logo

Hanuman Gatha: मंगलवार हनमान गाथा, हनुमान शलोक संकीर्तन, संकटनाशन हनुमंत स्तोत्र

हनुमान गाथा का पाठ करने या संकीर्तन करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। विशेषकर मंगलवार के दिन इस स्तोत्र या शलोक का पाठ करने से सम्पूर्ण हनुमान कथा करने का फल मिलता है। हनुमान संकीर्तन और गाथा का पाठ करने से सम्पूर्ण कष्ट दूर हो जाते हैं।

 
hanuman gatha mangalwar
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

प्रथम वंदन गुरु चरणन मै।
द्वितीय मात सरस्वती ध्याऊं॥

करहु कृपा हनुमंत जस गाऊं।
जो मांगो सोई फल पावऊं॥

चौपाई

जय जय जय श्री वीर हनुमाना।
अंजनीसुत बल बुद्धि निधाना॥

करही तपस्या शिव अंजनी माई।
मिलयो बरहि रुद्र गरभ महि आई॥

ग्यारहवें रुद्र प्रभु कियो अवतारा।
जय जय जय करहि जग सारा॥

बार अवस्था समझिहु फल रवि को।
चलिहू पवनसुत करहि भक्षि शशि को॥

चारहु ओर भयो अंधियारों।
करनि बिनत सब देवन पधारो॥

सुनहि बिनत प्रभु छोड़हि प्राणा।
करहि देवत जय जय वीर हनुमाना॥

ऋषि शाप दियो जब तोई।
भूल जाही शक्ति सभ तोरी॥

also read- श्री रामायण संकीर्तन: इसे पढ़ने से मिलता है संपूर्ण रामायण (Ramayana) पढ़ने का फल

जब कोई आन बतावहि तोई।
लौट आवे तोरी प्रभुताई॥

राम लखन चित्रकूट प्रभु आए।
हनुमंत दरस प्रभ राम के पाये॥

सात बृक्ष प्रभु तार के भेदे।
बाली के प्रभु प्राणन छेदे॥

सुग्रीव को दियो राज प्रभु राजा।
सीता माँ को खोजन काजा॥

चल्यो अंगद संग हनुमंत अगाधा।
पहुंचत चालत सामन नीर अपारा॥

जामवंत सुनाई सब कथा प्रसंगा।
लौट आई शक्ति सब अंगा॥

हनुमंत धरयो पर्वताकर शरीरा।
गरज गरज उछले बलबीरा॥

उड़त चल्यो लंका की औई ।
सुरसा मात परीक्षा को आई॥

जाओ कपि तुम बल बुद्धि निधाना।
उड़त चल्यो आगही वीर हनुमाना॥

राक्षसी लंकिनी रोकही तोरा।
मारही लाट गई प्रभ लोका॥

also read- Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में चंद्रग्रहण के साथ होगा महालय, जानें सभी श्राद्ध तिथियां

विभीषण के महिल राम गुण गाथा।
दीन्हों दरस रामदूत अगाधा॥

अशोक वाटिका पहुंचे हनुमंता।
अष्ट सिद्धि बर दिनो सीता माता॥

राक्षसन संहार कियो तुमने को।
जलहि लंक प्रभु कोपही तोके॥

सीता माँ का पता सुनाई।
राम प्रभु हरस हर आई॥

कंठ लगाई रघुवर प्रभु तोई।
भरत समान प्रिय हो तुम्ही॥

हनुमंत कहयो नहीं शक्ति मोरी।
राम प्रताप राम रामहि तोरी॥

छिड़यो संग्राम सुर राक्षसी असुरा।
बंदर भारू संग राक्षसि भक्षणा॥

मेघनाद जब बरछी चराई।
लछमन को मूर्छा तब आई॥

सुषेण बैद लंका ते लाये।
संजीवन लाये के प्राण बचाए॥

नागपाश जब रावण चलायो।
राम लखन को मूर्छा आयो॥

लाये गरुड जी प्राण बचाए।
दशरथ लाल जु होशहि आये॥

भ्रात लखन संग जबहि अहिरावण।
लै रघुनाथ पाताल मै चल्यो॥

पूजही देवी बहू बिधि बलही।
सुर नर जन नै ध्यानही धरयो॥

धरयो देवी रूप हनुवंता।
संहार कियो अहिरावण अभिमंता॥

रावण राज प्रभु राम संहारा।
सीता माँ लौटी प्रभ सारा॥

उफार दियो सीता महारानी।
खोजहि पवनसुत राम परछानी॥

सीना पार दिखायो बलवाना।
राम दरस हृदय सब आना॥

जय जय हनुमंत तुम्हारी प्रभुताई।
राम चरण सद रहो समाई॥

इह शलोक जो सुनहि सुनावे।
तिह जन संकट निकट नहीं आवे॥

तिस जन के सब कारज पूरे।
राम कृपा ते बंधन छूटे॥

दोहा
हनुमंत गाथा जो नर गावे।
दुख ताप ते हनुमंत छुड़ावे॥

राम राम राम गुण रविये।
बारि बारि इह नामही जपिए॥