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Haryana Air Quality: हरियाणा में बढ़ने लगा प्रदूषण का स्तर, वायु गुणवत्ता सूचकांक पहुंचा 400 के पार

Haryana Air Quality:  सरकार के तमाम दावों और तामझाम के बावजूद नवंबर की शुरुआत से हरियाणा में प्रदूषण स्तर बढ़ने लगा है। हालांकि सरकार का दावा है कि इस बार प्रदेश में पराली जलाने के मामले कम हुए
 
हरियाणा में बढ़ने लगा प्रदूषण का स्तर

Haryana Air Quality: हरियाणा में शुक्रवार को कुल 63 स्थानों पर पराली जताई गई। इनमें अंबाला में 9, फतेहाबाद 13, हिसार 1, जींद 9, कैथल 14, करनाल 2, पलवल 3, सिरसा 10, यमुनानगर में 2 स्थानों पर पराली जलाई गई। अब तक सीजन में कुल 2440 स्थानों पर पराली जलानी दर्ज की गई है। 
बावजूद इसके पिछले दो दिनों से एनसीआर के सात जिलों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से पार कर बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया है। 

झज्जर के बहादुरगढ़ में 457 और जींद में 434 वायु गुणवत्ता सूचकांक रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा, आठ शहरों की स्थिति 300 से अधिक एक्यूआई होने से ज्यादा खराब की श्रेणी में आ गए हैं। बढ़ते प्रदूषण के लिए हरियाणा सरकार के बाद अब पर्यावरण विभाग के अधिकारी भी पंजाब में जल रही पराली को इसका जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

 

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शुक्रवार को हरियाणा में केवल पंचकूला शहर की स्थिति संतोषनजक रही, यहां एक्यूआई 109 दर्ज किया गया और यमुनानगर का आंकड़ा 184 और अंबाला का 194 रहा। अधिक प्रदूषण वाले शहरों में जींद 434 गुरुग्राम 411, हिसार 428, बहादुरगढ़ 457, चरखी दादरी 406, फरीदाबाद 422 और रोहतक में 406 एक्यूआई रहा। 


इसी प्रकार, ज्यादा खराब की श्रेणी में भिवानी 390, बल्लभगढ़ 378, फतेहाबाद 390, सोनीपत 383, सिरसा 324, कैथल 358, मानेसर 393 और पानीपत में 341 रहा। इसके अलावा, करनाल में 236 व नारनौल में एक्यूआई 249 दर्ज किया गया।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले साल भी इसी प्रकार के हालात पैदा हो गए थे। बता दें कि 0 से 50 तक अच्छा और 51 से 100 तक वायु गुणवत्ता सूचकांक को संतोषजनक माना जाता है। 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक ज्यादा खराब और 400 से ज्यादा को बेहद खराब माना जाता है। 

 

63 स्थानों पर जलाई पराली

 

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हरियाणा में शुक्रवार को कुल 63 स्थानों पर पराली जताई गई। इनमें अंबाला में 9, फतेहाबाद 13, हिसार 1, जींद 9, कैथल 14, करनाल 2, पलवल 3, सिरसा 10, यमुनानगर में 2 स्थानों पर पराली जलाई गई। अब तक सीजन में कुल 2440 स्थानों पर पराली जलानी दर्ज की गई है। 

प्रदूषण को रोकने के लिए हरियाणा में इस बार सख्ती से नियमों का पालन किया गया है। पराली भी इस बार कम जली है। दिल्ली और एनसीआर के जिलों में बढ़ते प्रदूषण का कारण पंजाब है। पंजाब में लगातार पराली जलाई जा रही है और वहां से हवा के साथ धुआं यहां पहुंच रहा है।

बोर्ड की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है। फैक्ट्रियों समेत अन्य की लगातार निगरानी जारी है। -पी राघवेंद्र राव, चेयरमैन, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की सरकारें नाकाम


दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली और किसानों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। प्रदूषण बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान फैक्ट्रियों, वाहनों और अन्य कारकों का होता है। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की सरकारें अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम हैं।

अपनी नाकामी को छिपाने के लिए किसानों के सिर पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है। हर सीजन में सरकार किसानों को पराली की खरीद और उसके निपटान का वादा करती है लेकिन इसको अमलीजामा नहीं पहनाया जाता।

कुछ जगह मजबूरी में या फिर दुर्घटनावश पराली में आग लग जाती है लेकिन इसके लिए किसानों से जुर्माने के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली हो रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।