चीनी रक्षा मंत्री की चेतावनी: अगर अमेरिका ने किया ये काम तो मचा देंगे तबाही, अमेरिका कर रहा एशियाई देशों के साथ ये बड़ा काम
Haryana Update, desh duniya: अमेरिका के साथ जारी गतिरोध के बीच चीनी रक्षा मंत्री ली शांगफू ने सिंगापुर मे चुप्पी तोड़ी। उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत के महत्व पर जोर दिया। ली शांगफू ने कहा कि अगर चीन और अमेरिका के बीच संघर्ष होता है तो यह पूरी दुनिया के लिए खतरनाक तबाही का कारण बनेगा।
उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका को शांगरी-ला वार्ता में बहुत दूर नहीं होना चाहिए ताकि किसी भी मुद्दे पर कोई समझौता न हो सके। शांगफू की टिप्पणी रविवार को आई जब अमेरिकी सेना ने चीनी सेना पर एक विध्वंसक वारशिप के अमेरिकी युद्धपोत के पास खतरनाक तरीके से आगे बढ़ने का आरोप लगाया।
BREAKING: The Navy has released video of a Chinese warship sailing dangerously close to a Navy destroyer in the Taiwan Strait on Saturday pic.twitter.com/jA0YNEgsnM
— Dave Brown (@dave_brown24) June 5, 2023
शांगरी-ला वार्ता में चीनी रक्षा मंत्री की बात के मायने...
चीन के रक्षा मंत्री ने शांगरी-ला सुरक्षा संवाद में शीत युद्ध और नाटो के बारे में बात की। उन्होंने एशिया में नाटो जैसा संगठन बनाने के खिलाफ चेतावनी दी। इस दौरान ली शांगफू के इशारों का निशाना अमेरिका था। ली शांगफू ने कहा कि एशिया-प्रशांत में नाटो जैसे सैन्य संगठन का निर्माण पूरे क्षेत्र को युद्ध और संघर्ष की ओर खींचेगा।
उसने कहा: एशियाई देशों में इस तरह का संगठन खड़ा करने की कोशिश में एशियाई देशों के अपहरण किए जाते हैं। इस बीच, ली शांगफू ने अमेरिका का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि कुछ देश दूसरे देशों के मामलों में दखल देकर हथियारों की होड़ को बढ़ावा दे रहे हैं। उनकी (अमेरिका) शीत युद्ध की मानसिकता फिर से जोर पकड़ रही है।
चीन पर अमेरिका का ब्यान
शनिवार को चीनी रक्षा मंत्री के सामने शांगरी-ला डायलॉग में अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि ताइवान और दक्षिण चीन सागर को लेकर दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध खत्म नहीं होगा क्योंकि चीन बातचीत नहीं कर रहा है।
वहीं, चीन ने अमेरिका से बातचीत के लिए शर्त रखी। साथ ही वह चाहते हैं कि वाशिंगटन सीधा संकेत दे कि एशिया में उनकी स्थिति कम टकराव वाली होगी। वहीं, अमेरिका से भी ली शांगफू पर से प्रतिबंध हटाने की मांग की जा रही थी। दरअसल, अमेरिका ने 2018 में ली शांगफू के खिलाफ प्रतिबंधों की घोषणा की थी। इसकी वजह रूस से हथियारों का आयात था।
यूएस-चीन संबंधों में ताइवान सबसे हॉट स्पॉट है
अमेरिका ने 1979 में चीन के साथ फिर से संबंध स्थापित किए और ताइवान के साथ गंभीर राजनयिक संबंध तोड़ दिये थे। हालांकि चीन की आपत्ति के बावजूद अमेरिका ताइवान को हथियारों की आपूर्ति करता रहा। अमेरिका ने भी दशकों से एक-चीन नीति का समर्थन किया है, लेकिन ताइवान के मुद्दे पर अस्पष्ट नीति है।
राष्ट्रपति जो बाइडेन फिलहाल इस नीति से हटते नजर आ रहे हैं। उन्होंने बार-बार कहा कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो अमेरिका उसकी मदद के लिए आएगा। यूएस के राष्ट्रपति ने हथियारों की बिक्री जारी रखते हुए अमेरिकी अधिकारियों और ताइवान के बीच संचार को आगे बढ़ाया।