नए साल पर RBI के नए गवर्नर कर सकते है बड़ा ऐलान, लोगों को मिलेगा ये तोहफा!
RBI Repo Rate: आरबीआई के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट को स्थिर रखते हुए महंगाई को काबू में रखने पर फोकस किया। अब, संजय मल्होत्रा ने आरबीआई गवर्नर का कार्यभार संभाला है। बाजार और जनता की उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि नए गवर्नर अर्थव्यवस्था और महंगाई के बीच सही संतुलन बिठाकर राहत देंगे या नहीं।
शक्तिकांत दास की विरासत: नोटबंदी से कोविड तक प्रभावी नेतृत्व
शक्तिकांत दास का कार्यकाल भारतीय आर्थिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय रहा।
नोटबंदी के फैसले के बाद अर्थव्यवस्था को संभालने की चुनौती हो,
या फिर कोविड-19 की विषम परिस्थितियों में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का सवाल—
दास ने मौद्रिक नीति में कुशल प्रबंधन के जरिए स्थायित्व सुनिश्चित किया। उनके नेतृत्व में दो साल तक रेपो रेट स्थिर रहा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था एक संरचित दिशा में आगे बढ़ सकी।
संजय मल्होत्रा पर उम्मीदों का भार
अब जब राजस्व सचिव के पद से नए गवर्नर बने संजय मल्होत्रा आरबीआई की कमान संभाल चुके हैं, तो उनसे महंगाई और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन की अपेक्षा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि उनकी नियुक्ति के बाद फरवरी में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में ब्याज दरों में कटौती पर चर्चा हो सकती है।
क्या महंगाई पर नियंत्रण वृद्धि की कीमत पर होगा?
आरबीआई को यह तय करना होगा कि वह आर्थिक विकास को बल देने के लिए ब्याज दर में कटौती करता है, या महंगाई पर सख्ती बनाए रखता है।
हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के 2025 तक धीमी दर से कटौती के संकेत और रुपये की विनिमय दर पर इसके प्रभाव ने ब्याज दर कटौती के समय पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
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क्या मामूली कटौती काफी होगी?
पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि ब्याज दर में केवल 0.50% की कटौती होती है, तो इसका आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव सीमित हो सकता है।
हालांकि नए गवर्नर का संतुलित दृष्टिकोण, जो मुद्रास्फीति को नियंत्रित करते हुए विकास के प्रति जागरूक हो, उम्मीदें जगाता है कि फरवरी की एमपीसी बैठक में कुछ राहत देखने को मिल सकती है।
आगे की राह पर सभी की निगाहें
अब यह देखना अहम होगा कि संजय मल्होत्रा आर्थिक वृद्धि और महंगाई के इस समीकरण को कैसे हल करते हैं। आरबीआई के फैसले न केवल देश की अर्थव्यवस्था बल्कि लाखों लोगों की उम्मीदों को भी प्रभावित करेंगे।