दिल्ली के निजी स्कूलों ने बढ़ाया अभिभावकों का बजट, बढ़ा दिया इतना ज्यादा परिवहन शुल्क
Haryanaupdate.दौ सालों के बाद दिल्ली के स्कूल पूरी तरह खुलने के बाद अभिभावकों को बहुत दिक्कत आ रही है, बच्चो के एडमिशन फीस, किताबें, ड्रेस के दाम तो पहले ही बढ़ा दिये गए थे लेकिन अब निजी स्कूलों ने परिवहन शुल्क भी बढ़ा दिया है, देखिये पूरी खबर...
राजधानी में एक अप्रैल से सभी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2022-23 की शुरूआत आफलाइन माध्यम से हो गई है. दो साल के बाद एकदम से आफलाइन माध्यम से स्कूल खुलने से अभिभावकों की जेब पर यूनिफार्म और किताबों के बाद अब परिवहन शुल्क का बहुत असर पड़ रहा है. निजी स्कूलों ने परिवहन शुल्क को इस सत्र से 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. जिससे अभिभावकों का बजट तक बिगड़ गया है.
स्कूलों के प्रधानाचार्यों का कहना है कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों की सुविधा बंद होने के बाद उन्हें बाहर से निजी बस व वैन संचालकों की बस सुविधा लेनी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि बसों के दाम बढ़ने को लेकर वो कुछ नहीं कर सकते हैं. क्योंकि ये दाम डीजल के दाम बढ़ने के बाद ही बढ़ाए गए हैं. उनके मुताबिक अगर सरकार डीटीसी की सुविधा फिर से शुरू कर देती है तो परिवहन शुल्क में जरूर अंतर आएगा और अभिभावकों को जेब पर भी इतना बोझ नहीं पड़ेगा.
होली ग्रुप आफ स्कूल्स के चेयरमैन अजय अरोड़ा ने बताया कि उनके स्कूल में पहले 25 से बसे चलती थी. जिसमें 15 बसें डीटीसी की और 10 स्कूल की तरफ से उपलब्ध कराई गई निजी बसे थी. लेकिन मौजूदा सत्र से पांच से छह बसे चल रही है. ये सभी निजी संचालक की बसें हैं. उन्होंने कहा कि स्कूल बसों की संख्या घटने से रूट की समस्या आ रही है. पहले के वर्षों में जो रूट तय किया था वो पूरा बदलना पड़ा है. चूंकि पहले हर रूट की अलग बसे थी, जिससे बच्चे समय पर घर भी पहुंच जाते हैं. लेकिन अब बसों की संख्या घटने से हमें तीन से चार रूट के लिए एक बस चलानी पड़ रही है. इससे बच्चों को घर पहुंचने में भी पहले के मुकाबले अधिक समय लग रहा है. सरकार अगर डीटीसी की सुविधा शुरू कर दे तो ये समस्या खत्म हो जाएगी. उन्होंने कहा कि पहले छात्रों के प्रति माह दो हजार रुपये परिवहन शुल्क के लिए जाते थे. लेकिन अब डीजल के दाम बढ़ने के बाद ये प्रति माह तीन हजार रुपये लिए जा रहे हैं.
वहीं, दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने कहा कि राजधानी के अधिकतर निजी स्कूल परिवहन शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं. स्कूलों ने तीन से चार गुना दाम बढ़ाया है. जिन छात्रों के दो से तीन बच्चे पढ़ते हैं उनका पूरा बजट बिगड़ गया है. उन्होंने कहा कि कई स्कूल में अभिभावकों ने परिवहन शुल्क जमा तक करा दिया लेकिन बच्चे को स्कूल बस न समय पर लेने आती है और न छोडने. वहीं, स्कूलों ने बसों की संख्या भी घटाई है. एक बस को बच्चो को स्कूल से घर छोड़ने के लिए दो से तीन राउंड लगाने पड़ रहे हैं. जिस कारण दूसरे और तीसरे राउंड के बच्चों को दोपहर के वक्त तेज धूप में पार्क में बैठकर बस का इंतजार करना पड़ता है.
वहीं, द्वारका स्थित सेंट थामस स्कूल के अभिभावक ने बताया कि उनके दो बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं. कोरोना से पहले स्कूल परिवहन शुल्क के तीन हजार रूपये वसूलता था. लेकिन अब ये दाम बढ़कर चार हजार रुपये हो गए हैं. उन्होंने कहा कि वो यूनिफार्म, ड्रेस और ट्यूशन फीस बढ़ने के बाद अब आठ हजार रुपये केवल परिवहन के नाम देने की क्षमता में नहीं है. ऐसे में वो फिलहाल खुद ही बच्चों को स्कूल लेने और छो़ड़ने जाते हैं.