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Haryana: मंत्री विज ने लिया बड़ा एक्शन, हरियाणा के इन कर्मचारियों को किया सस्पेंड

Haryana: हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने 2 फरवरी, 2025 को राजीव गांधी विद्युत भवन, यूएचबीवीएन, रोहतक का औचक निरीक्षण किया।
 
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Haryana, Haryana Update: हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने 2 फरवरी, 2025 को राजीव गांधी विद्युत भवन, यूएचबीवीएन, रोहतक का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सर्कल रोहतक के अंतर्गत बिजली सेवा केंद्र पर लंबित बिजली शिकायतों की समीक्षा की तथा पाया कि कई शिकायतों का समाधान निर्धारित समय सीमा चार घंटे में नहीं किया गया।

इस पर उन्होंने कार्यकारी अभियंता, ऑपरेशन सर्कल, यूएचबीवीएन, रोहतक को जांच करने के निर्देश दिए तथा संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा। जांच के दौरान कुल छह शिकायतें सामने आईं, जिनमें से चार का समय सीमा में समाधान कर दिया गया, जबकि दो शिकायतों का समाधान देरी से किया गया। ये शिकायतें श्री जय नारायण, गांव हमायुपुर से संबंधित थीं, जो उनके पोते श्री राहुल ने एपी कनेक्शन पर बिजली आपूर्ति बाधित होने के संबंध में दर्ज कराई थी। 

जांच में पाया गया कि इन मामलों में कनिष्ठ अभियंता श्री विकास कौशिक और लाइनमैन श्री रामबीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार थे। 1 फरवरी 2025 को प्रातः 6:40 बजे हमायुपुर एपी फीडर की 11 केवी लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे प्रातः 10:25 बजे तक ठीक कर दिया गया, परन्तु प्रभावित क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं की गई। इससे जेई की उदासीनता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होती है। क्षेत्र का प्रभारी होने के बावजूद भी उन्होंने मौके का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण नहीं किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने शिकायतों के समाधान में रुचि नहीं ली। साथ ही जेई ने अपने अधीनस्थों को बिना पीटीडब्ल्यू स्वीकृति के कार्य करने दिया, जिससे गंभीर दुर्घटना होने का खतरा बना रहा। इसे घोर लापरवाही माना गया है। 

तदनुसार कार्यकारी अभियंता, रोहतक ने लाइनमैन श्री रामबीर को तुरन्त प्रभाव से निलम्बित कर दिया है, जबकि जेई श्री विकास कौशिक के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु मामला यूएचबीवीएन मुख्यालय, पंचकूला को भेज दिया है। मामले की समीक्षा करने के पश्चात यूएचबीवीएन पंचकूला ने जेई श्री विकास कौशिक को चार्जशीट जारी कर 30 दिन के अन्दर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो इसे दोष स्वीकारोक्ति माना जाएगा और उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।