OPS Update: क्या OPS की वापसी होगी? DA बढ़ाने पर CM ने क्या कहा, जानिए पूरी डिटेल
डीए में बढ़ोतरी की मांग
महासंघ ने अपने पत्र में केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में डीए को 50% से 53% तक बढ़ाने और जनवरी 2025 से 3% की प्रस्तावित वृद्धि को एक मानक के रूप में रखा है। राज्य सरकार के कर्मचारियों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार को भी इसी आधार पर डीए बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए और इसके साथ बकाया एरियर भी जारी करना चाहिए।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर क्या कहा?
राज्य के कर्मचारियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि OPS को सभी कर्मचारियों के लिए लागू किया जाए। महासंघ ने सरकार से यह भी कहा है कि 1 मार्च 2024 को घोषित संशोधित पेंशन योजना की अधिसूचना जल्द जारी की जाए ताकि कर्मचारियों को जल्द से जल्द लाभ मिल सके।
खाली पदों पर भर्ती की मांग
महासंघ ने सरकार को बताया कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में 35% पद खाली पड़े हैं। उन्होंने इसके लिए पिछले 8-10 वर्षों में सेवानिवृत्ति के कारण बढ़ी रिक्तियों के मुकाबले कम भर्तियों को जिम्मेदार ठहराया। सरकार से अनुरोध किया गया है कि इन खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए ताकि प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से चल सकें।
डीए और ओपीएस के अलावा अन्य मांगें
- हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और अन्य भत्तों में बढ़ोतरी।
- महिला कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार की नीति के अनुरूप दो साल की चाइल्ड केयर लीव।
- बकाया भुगतान जल्द जारी करने की मांग।
सीएम फडणवीस का जवाब
राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर उठ रही चिंताओं पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्त पोषण में कटौती नहीं करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिव भोजन थाली, मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना और अन्य योजनाओं का संचालन जारी रहेगा।
लड़की बहन योजना से 10-15 लाख महिलाएं हो सकती हैं बाहर
सीएम फडणवीस ने यह भी संकेत दिया कि ‘लड़की बहन योजना’ के आवेदनों की जांच की जा रही है, जिसमें 10-15 लाख महिलाएं अयोग्य पाई जा सकती हैं। सरकार अब इस योजना की समीक्षा कर रही है, जिससे यह तय किया जाएगा कि कौन इस योजना के लिए पात्र होगा।
महाराष्ट्र सरकार के कर्मचारियों ने डीए बढ़ाने, ओपीएस लागू करने और खाली पदों पर भर्ती करने की मांग की है। वहीं, मुख्यमंत्री फडणवीस ने सरकार की योजनाओं को जारी रखने का आश्वासन दिया है और वित्तीय तंगी के बावजूद कल्याणकारी योजनाओं को बरकरार रखने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि आगामी बजट में सरकार इन मांगों पर क्या फैसला लेती है।