Repo Rate: रेपो रेट घटा, लेकिन बैंक ने ब्याज नहीं घटाया! EMI घटाने के लिए क्या करें?
आजकल अधिकांश बैंकों की लोन की ब्याज दरें आरबीआई के रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी होती हैं। इसका मतलब है कि जैसे ही रेपो रेट में कटौती होती है, वैसे ही बैंकों की ब्याज दरों में भी गिरावट आती है, जिससे आपके कर्ज की ब्याज दर कम हो जाती है और साथ ही आपकी ईएमआई भी घट सकती है। हालांकि, कुछ बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में कटौती नहीं की है, तो ऐसे में लोन लेने वाले ग्राहकों के पास ब्याज दर कम करने के लिए अन्य विकल्प मौजूद हैं।
लोन बैलेंस ट्रांसफर क्या है
अगर आपके मौजूदा बैंक ने ब्याज दरें कम नहीं की हैं, तो आप दूसरे बैंक में लोन बैलेंस ट्रांसफर का विकल्प चुन सकते हैं। लोन बैलेंस ट्रांसफर का मतलब है कि आप अपने लोन की बची हुई राशि को एक नए बैंक में ट्रांसफर करते हैं, जहां ब्याज दर कम हो। इस प्रक्रिया के माध्यम से, आप अपनी ब्याज दर कम कर सकते हैं और ईएमआई भी घटा सकते हैं। यह सुविधा आजकल अधिकतर बैंक ऑफर करते हैं।
लोन बैलेंस ट्रांसफर के फायदे
लोन बैलेंस ट्रांसफर के बहुत से फायदे हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपका होम लोन 9.50 फीसदी की ब्याज दर पर चल रहा है और आप इसे 8.50 फीसदी ब्याज दर वाले बैंक में ट्रांसफर करते हैं, तो ब्याज दर में 1 फीसदी की कमी हो जाएगी। मान लीजिए कि आपने 30 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए लिया है, तो पहले 9.50 फीसदी ब्याज पर आपकी ईएमआई 27,964 रुपये थी और कुल ब्याज के रूप में आपको 37,11,345 रुपये चुकाने थे। लेकिन, बैलेंस ट्रांसफर के बाद जब ब्याज दर 8.50 फीसदी हो जाती है, तो आपकी ईएमआई घटकर 26,035 रुपये हो जाती है। इस तरह से आपको लगभग 2 हजार रुपये की बचत होगी, जो सालाना करीब 24 हजार रुपये हो जाएगी। ब्याज के रूप में भी आपको केवल 32,48,327 रुपये ही चुकाने होंगे, जो कि करीब 4.5 लाख रुपये की बचत करेगा।
बैलेंस ट्रांसफर करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
लोन बैलेंस ट्रांसफर कराते समय कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखनी चाहिए। सबसे पहले, आपका सिबिल स्कोर अच्छा होना चाहिए, क्योंकि दूसरा बैंक आपको कम ब्याज दर पर लोन ट्रांसफर का ऑफर तभी देगा जब आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा होगा। इसके अलावा, बैलेंस ट्रांसफर के लिए कुछ बैंक शुल्क भी वसूलते हैं, इसलिए आपको इस प्रक्रिया के नफा-नुकसान का आकलन करके ही इस पर निर्णय लेना चाहिए।
लोन बैलेंस ट्रांसफर का फायदा आपको लोन के शुरुआती चरण में सबसे ज्यादा मिलता है, क्योंकि इस समय बैंकों का अधिकतर हिस्सा ईएमआई में ब्याज के रूप में लिया जाता है। इसके बाद जैसे-जैसे लोन की अवधि बढ़ती है, ब्याज की राशि कम होती जाती है और ईएमआई की ज्यादा हिस्सा मूलधन का हो जाता है।
कब मिलेगा फायदा
लोन बैलेंस ट्रांसफर से आपको तभी ज्यादा फायदा मिलेगा जब आप इसे लोन के पहले कुछ वर्षों में कराते हैं, जब आपकी ईएमआई का बड़ा हिस्सा ब्याज के रूप में जाता है। अगर आप लोन के शुरुआती चरण में बैलेंस ट्रांसफर करते हैं, तो आपको बड़ी बचत हो सकती है।
इस तरह से, आप अपनी लोन की ब्याज दर कम करके और ईएमआई घटाकर लंबे समय में अच्छी बचत कर सकते हैं। हालांकि, बैलेंस ट्रांसफर का निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है।