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New IT Bill: इनकम टैक्स के नए बिल को हरी झंडी, टैक्सपेयर्स के लिए क्या हैं नए बदलाव?

New IT Bill : सरकार ने नए इनकम टैक्स बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे टैक्सपेयर्स के लिए कई अहम बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के तहत टैक्स स्लैब, छूट और रिटर्न भरने की प्रक्रिया में कुछ सुधार किए गए हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिल सकती है। अगर आप भी टैक्स भरते हैं या इससे जुड़ी जानकारी चाहते हैं, तो यह अपडेट आपके लिए जरूरी है। नीचे जानें पूरी डिटेल।
 
 
New IT Bill: इनकम टैक्स के नए बिल को हरी झंडी, टैक्सपेयर्स के लिए क्या हैं नए बदलाव?
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Haryana update : मोदी सरकार ने शुक्रवार, 7 फरवरी 2025 को नए इनकम टैक्स बिल को मंजूरी दे दी है। यह बिल 1961 के पुराने आयकर अधिनियम की जगह लेगा और इसमें वे सभी संशोधन और प्रावधान नहीं होंगे जो अब प्रासंगिक नहीं हैं। सरकार का उद्देश्य इस कानून को आम लोगों के लिए आसान बनाना है, ताकि उन्हें इसे समझने के लिए टैक्स विशेषज्ञों की मदद न लेनी पड़े।

क्या होगा नया बदलाव?

मौजूदा इनकम टैक्स कानून में कई जटिल प्रावधान हैं, जो मुकदमेबाजी को बढ़ावा देते हैं। नए बिल में भाषा सरल होगी और जटिल कानूनी प्रावधान नहीं होंगे, जिससे विवादित टैक्स मामलों में कमी आने की संभावना है। इससे सरकार और करदाताओं दोनों को राहत मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल को मंजूरी दी गई है। अब इसे अगले सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा। पहले इसे वित्तीय मामलों की स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा, जहां इस पर विस्तृत चर्चा होगी। बता दें कि संसद का बजट सत्र फिलहाल 13 फरवरी को समाप्त होगा और 10 मार्च से फिर शुरू होकर 4 अप्रैल तक चलेगा।

क्यों पड़ी नए इनकम टैक्स बिल की जरूरत?

देश में मौजूदा इनकम टैक्स कानून 1961 में बना था। पिछले 60 वर्षों में लोगों की आय के स्रोत, कंपनियों के व्यापार करने के तरीके और तकनीकी विकास में बड़े बदलाव आए हैं। समय के साथ आयकर अधिनियम में कई संशोधन किए गए, लेकिन अब इसे पूरी तरह से नया स्वरूप देने की आवश्यकता महसूस की गई।

सरकार का मानना है कि देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में आए बदलावों को देखते हुए पुराने इनकम टैक्स कानून को पूरी तरह से बदलना जरूरी हो गया है।

क्या इनकम टैक्स स्लैब में होगा बदलाव?

जानकारी के अनुसार, इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रक्रियाओं और अनुपालन को सरल बनाना है। हालांकि, इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव की संभावना कम है, क्योंकि यह आमतौर पर वित्त अधिनियम के माध्यम से किया जाता है।

गौरतलब है कि 2010 में 'प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक, 2010' संसद में पेश किया गया था, जिसे समीक्षा के लिए स्थायी समिति के पास भेजा गया था। लेकिन 2014 में सरकार बदलने के बाद यह विधेयक निरस्त कर दिया गया था। अब एक दशक बाद सरकार एक नया और सरल इनकम टैक्स कानून लाने की तैयारी कर रही है, जिससे करदाताओं को राहत मिलेगी और कर प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी।