Check Bounce: जानें चेक बाउंस के किन मामलों में नहीं दर्ज होगा केस...
चेक बाउंस क्या होता है? Check Bounce
जब कोई व्यक्ति बैंक में चेक जारी करता है और बैंक उस चेक को किसी कारणवश (जैसे कि अकाउंट में पर्याप्त धन न होना, सिग्नेचर में अंतर, गलत तारीख या राशि लिखना आदि) अस्वीकार कर देता है, तो इसे चेक बाउंस कहते हैं।
DA Table: होली का तोहफा, नया DA चार्ट जारी, कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत!
- प्रारंभिक कार्रवाई:
चेक बाउंस होने पर बैंक शुरुआत में ग्राहक को नोटिस भेजता है। बैंक ग्राहक को लगभग तीन महीने तक नोटिस (Check Bounce Notice) भेजता है। - नोटिस का जवाब नहीं देने पर:
यदि तीन महीने तक ग्राहक नोटिस का जवाब नहीं देता, तो बैंक ग्राहक के खिलाफ अदालत में मुकदमा दर्ज कर सकता है। अदालत द्वारा सजा और जुर्माने का प्रावधान नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट, 1881 के तहत किया गया है।
बैंक नियमों में बदलाव और कोर्ट का नया फैसला Check Bounce
बैंक अक्सर अपने नियमों में बदलाव करते रहते हैं, और ये बदलाव सरकार एवं हाईकोर्ट के फैसलों के आधार पर होते हैं। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामलों पर एक नया फैसला सुनाया है।
- नई अदालत की राय:
कोर्ट ने कहा कि यदि किसी बैंक का विलय किसी अन्य बैंक में हो चुका है, तो ऐसे मामलों में जब बैंक चेक को अमान्य करार देता है तो एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध नहीं गठित होगा। - उदाहरण:
इंडियन बैंक में विलय हो चुके चेक के मामले में बांदा की अर्चना सिंह गौतम की याचिका स्वीकार की गई और न्यायमूर्ति अरुण सिंह देशवाल ने आदेश दिया कि ऐसे मामलों में ग्राहक पर मुकदमा नहीं किया जाएगा।
चेक जारी करने के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें Check Bounce
चेक जारी करते समय कुछ बुनियादी नियमों का पालन करना जरूरी है:
- खाते में पर्याप्त बैलेंस:
चेक जारी करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपके बैंक खाते में पर्याप्त धन है। - सही तारीख और राशि:
चेक पर तारीख और राशि दोनों शब्दों और अंकों में एक समान होनी चाहिए। - सही सिग्नेचर:
चेक पर वही सिग्नेचर करें जो बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज हो। - वैलिड चेक:
चेक जारी होने के बाद वह 3 महीने के लिए वैध होता है। 3 महीने से अधिक पुराने चेक को बैंक अस्वीकार कर देता है।
DA Table: होली का तोहफा, नया DA चार्ट जारी, कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत!
अदालत का संदेश Check Bounce
कोर्ट ने यह भी कहा कि एनआई एक्ट के अनुसार जारी किया गया चेक तभी वैध माना जाता है, जब वह बैंक द्वारा स्वीकार किया जाए। अगर बैंक द्वारा चेक को अमान्य करार दिया जाता है, तो चेक बाउंस का मामला नहीं बनेगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि चेक बाउंस के मामलों में अपराध तभी सिद्ध होगा, जब चेक वैध हो और फिर भी उसे बैंक ने अस्वीकार कर दिया हो।