8th Pay Commission: इन राज्यों के सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ!
आठवें वेतन आयोग की मांग क्यों जरूरी है?
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की संख्या लगभग 50 लाख और 67 लाख है। इनकी आय और जीवनस्तर में सुधार के लिए 8th Pay Commission की मांग जोर पकड़ रही है। प्री-बजट कंसल्टेशन मीटिंग में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) के राष्ट्रीय सचिव स्वदेश देव रॉय ने इस मांग को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग के लागू होने को 10 साल हो गए हैं। अब नया आयोग गठित करने का समय आ गया है।
सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) का गठन फरवरी 2014 में हुआ था। इसकी सिफारिशें जनवरी 2016 में लागू की गई थीं। वर्तमान आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद, कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए वेतन और पेंशन में संशोधन के लिए आठवें वेतन आयोग का गठन आवश्यक हो जाएगा।
NC-JCM का सरकार को पत्र
पिछले महीने, नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र लिखकर तुरंत नए वेतन आयोग के गठन की मांग की। शिव गोपाल मिश्रा, जो कि NC-JCM के सचिव हैं, ने इस बात पर जोर दिया कि हर 10 साल में नया वेतन आयोग गठित करना ऐतिहासिक ट्रेंड है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 9 साल पहले लागू की गई थीं, और अब 1 जनवरी 2026 से नए संशोधन की आवश्यकता है।
प्री-बजट बैठक में अन्य मांगें
8वें वेतन आयोग के अलावा, ट्रेड यूनियनों ने प्री-बजट मीटिंग में कई अन्य प्रमुख मुद्दे उठाए। न्यूनतम EPFO पेंशन को 5,000 रुपये प्रति माह तक बढ़ाने की मांग की गई। इसके अलावा, आयकर छूट सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति वर्ष करने का सुझाव दिया गया।
सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को फिर से लागू करने की मांग ने भी जोर पकड़ा। साथ ही, गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना लागू करने की सिफारिश की गई।
TUCC और अन्य यूनियनों के सुझाव
TUCC (Trade Union Coordination Committee) के राष्ट्रीय महासचिव एसपी तिवारी ने कहा कि सरकारी उपक्रमों (PSUs) के निजीकरण और निगमीकरण को रोका जाना चाहिए। उन्होंने अमीरों पर 2% अतिरिक्त टैक्स लगाने का सुझाव दिया। इससे मिलने वाले राजस्व का उपयोग अनौपचारिक श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जा सकता है।
कृषि श्रमिकों और अन्य योजनाओं पर जोर
बैठक के दौरान कृषि श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने की बात कही गई। भारतीय मजदूर संघ (BMS) के आयोजन सचिव पवन कुमार ने EPS-95 पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये करने की मांग की।
उन्होंने यह भी सिफारिश की कि पेंशन आय को टैक्स से छूट दी जाए और आयकर छूट सीमा बढ़ाई जाए। उनके अनुसार, 8वें वेतन आयोग का गठन कर्मचारियों और पेंशनधारकों के जीवनस्तर में सुधार लाने के लिए बेहद जरूरी है।
आठवें वेतन आयोग का महत्व
8th Pay Commission केवल कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। यह आयोग उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए व्यापक सिफारिशें देता है। इसमें भत्तों, पेंशन, और अन्य लाभों का समायोजन शामिल है। पिछले आयोगों के ट्रेंड्स को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि नए आयोग की सिफारिशें 2026 से लागू हो सकती हैं।
बजट 2025: उम्मीदें और चुनौतियां
इस बार का बजट 2025-26 केवल वेतन आयोग पर केंद्रित नहीं होगा। इसमें आयकर छूट, सामाजिक सुरक्षा, और पेंशन योजनाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने बड़ी चुनौती यह होगी कि वे ट्रेड यूनियनों और सरकारी कर्मचारियों की सभी मांगों को कैसे पूरा करें।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें बजट पर
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बजट 2025 में उम्मीदों की एक नई किरण है। 8वें वेतन आयोग का गठन उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इसके साथ ही, ट्रेड यूनियनों की अन्य मांगें भी बजट के केंद्र में रहेंगी।
सकता है। इसके साथ ही, ट्रेड यूनियनों की अन्य मांगें भी बजट के केंद्र में रहेंगी।