S. Jaishankar के इन 5 बयानो ने बाइडेन प्रशासन की उड़ाई धज्जियां , US से हो सकते है संबंध खराब?
S. Jaishankar, Latest News: अवसर पर उन्होंने बाइडन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत भी की। इसके अलावा अपने समकक्षों (senior officers) के साथ उनकी कई बैठकें द्विपक्षीय (bilateral) थीं जबकि उनमें से कुछ अनौपचारिक बैठकें भी थीं। अब जब विदेश मंत्री (foreign Minister) बुधवार को अपनी यात्रा समाप्त कर रहे हैं, तो हम उन पांच कड़े बयानों पर भी एक नज़र डालते हैं जो उन्होंने अमेरिका (America) दौरे पर अमेरिका के खिलाफ दिए हैं।

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1. आप किसे बेवकूफ बना रहे हैं?(Who are you fooling?)
भारतीय-अमेरिकन समुदाय (Indian-American Community)की ओर से वाशिंगटन (Washington)में आयोजित एक कार्यक्रम में विदेश मंत्री (Washington) एस जयशंकर (S Jaishankar)ने पाकिस्तान को लड़ाकू विमान एफ-16 के उच्चीकरण के लिए 45 करोड़ डॉलर की funds sanctioned करने पर सवाल उठाए। विदेश मंत्री (foreign Minister) ने कहा कि इस्लामाबाद और वाशिंगटन (Islamabad and Washington)के बीच संबंधों से ना तो पाकिस्तानियों का भला है और ना ही अमेरिकियों का। उन्होंने आगे कहा, 'अमेरिका को पाकिस्तान से अपने संबंधों पर सोचना चाहिए कि उसे इससे क्या हासिल हुआ।' जयशंकर ने कहा, 'मैं ये बात इसीलिए कह रहा हूं क्योंकि ये आतंकवाद विरोधी (anti terrorism) सामान है। हर कोई जानता है, ये आप भी जानते हैं कि विमानों को कहां तैनात किया गया है और उनका क्या उपयोग किया जा रहा है। आप ये बातें कहकर किसी को बेवकूफ नहीं बना सकते।

2. गरीब देश से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तक(From poor country to 5th largest economy)
न्यूयॉर्क (New York) में एक विशेष 'इंडिया@75' शोकेसिंग इंडिया-यूएन पार्टनरशिप इन एक्शन' कार्यक्रम में बोलते हुए एस जयशंकर(S Jaishankar) ने कहा कि 2047 तक खुद को एक विकसित देश के रूप में देखता है, जब हमारी आजादी के 100 साल पूरे होंगे। विदेश मंत्री ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद(Foreign Minister British Colonialism) की आलोचना करते हुए कहा, "18वीं शताब्दी में भारत वैश्विक जीडीपी (India Global GDP) का एक चौथाई हिस्सा था। लेकिन 20वीं शताब्दी तक आते-आते उपनिवेशवाद की वजह से भारत दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक बन गया। आज भारत अपनी आजादी के 75वें वर्ष में संयुक्त राष्ट्र के सामने "गर्व से दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था" के रूप में खड़ा है और अभी भी "सबसे मजबूत, सबसे उत्साही और निश्चित रूप से सबसे तर्कपूर्ण लोकतंत्र"(rational democracy) के रूप में उभर रहा है।

3. हमें अच्छी तरह पता होता कि वे क्या लिखने वाले हैं(I knew very well what they were going to write)
एस जयशंकर (S Jaishanka)ने भारत को लेकर 'पक्षपाती खबरें' दिखाने पर 'द वाशिंगटन पोस्ट' समेत कई बड़े अमेरिकी मीडिया संस्थानों पर निशाना साधा। जयशंकर ने भारतीय-अमेरिकियों के साथ 25 सितंबर को एक संवाद में कहा, 'मैं मीडिया में आने वाली खबरों को देखता हूं। कुछ समचार पत्र हैं, जिनके बार में आपको अच्छी तरह पता होता है कि वे क्या लिखने वाले हैं और ऐसा ही एक समाचार पत्र यहां भी है।' बतादें कि वाशिंगटन पोस्ट वाशिंगटन डीसी (Washington Post Washington DC)में प्रकाशित होने वाला राष्ट्रीय दैनिक पत्र है और इसके मालिक 'अमेजन' के जेफ बेजोस(Jeff Bezos) हैं।

4. भारत में नहीं चल पाती तो विदेश में प्रोपेगेंडा फैलाते हैं(If it is not possible in India, then spread propaganda abroad.)
एस जयशंकर (S Jaishankar)ने कहा कि 'मेरा यह कहना है कि कुछ लोग पूर्वाग्रही हैं। वे कोशिश करते हैं फैसले तय करने की और जैसे-जैसे भारत अपने फैसले खुद करना शुरू करेगा, इस तरह के लोग जो अपने को संरक्षक (custodian)की भूमिका में देखते हैं, उनके विचार बाहर आएंगे।' विदेश मंत्री(' foreign Minister) ने कहा कि ऐसे समूहों कि भारत में जीत नहीं हो रही है। ऐसे में ये समूह देश के बाहर जीतने की कोशिश करते हैं और बाहर से भारत की राय व धारणाएं(opinions and ideas) बनाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि हमें इसे लेकर सतर्क (alert)होने की जरूरत है।

5. अमेरिका ने ही भारत को समझा पराया(America only convinced India)
विदेश मंत्री जयशंकर (External Affairs Minister Jaishankar)ने कहा कि रूसी रक्षा उपकरणों पर भारत की निर्भरता और मॉस्को(External Affairs Minister Jaishankar) के साथ मजबूत रिश्तों का कारण यह नहीं है कि नई दिल्ली ने इन उपकरणों को हासिल करने के लिए अमेरिका से संपर्क नहीं किया। उन्होंने कहा, हमारे संबंधों में आया एक बदलाव रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी है, जो शायद पिछले करीब 15 साल में अपने मौजूदा रूप में आया है। 1965 से आगामी 40 साल तक भारत में अमेरिका का कोई सैन्य उपकरण नहीं आया। इस दौरान भारत-सोवियत, भारत-रूस के रिश्ते मजबूत हुए। लेकिन इसका कारण भारत की ओर से कोशिश का अभाव नहीं है। मैं इसकी पुष्टि स्वयं कर सकता हूं। मेरे रिश्तेदार, मेरे पिता, मेरे दादा, रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence0में काम करते थे। इसलिए, मैं पहले से जानता हूं कि उन वर्षों में अमेरिका को यह समझाने के लिए कितने महान प्रयास किए गए थे कि एक मजबूत, एकजुट, स्वतंत्र, समृद्ध भारत का होना अमेरिकी हित में है।