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UNHRC में सिंध के लोगों ने किया पाकिस्तान का पर्दाफाश

सिंधी फाउंडेशन के निदेशक मुजफ्फर तालपुर ने कहा कि अगर कोई अधिकारों की बात करे तो वह गायब हो जाता है और चिंताजनक बात यह है कि हमें कई सिंधी कार्यकर्ताओं की लाशें मिली हैं तो ये अभी बड़ा मुद्दा है. अधिकांश युवा सिंधी अब डर में जी रहे हैं. पूरा समाज दहशत में जी रहा है.

 
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद.
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 52वें सत्र के दौरान एक बार फिर पाकिस्तान का पर्दाफाश हो गया है. यहां सिंध में लोगों पर पाकिस्तान सरकार और उसकी सेना के अत्याचार के कई किस्से सामने आए. सिंधी अमेरिकी मानवाधिकार कार्यकर्ता फातिमा गुल ने कहा कि सिंधी आर्थिक स्थिति, शिक्षा और बुनियादी ढांंचा सहित बहुत सारी समस्याओं का सामना कर रहे हैं और सिंध पाकिस्तान का फोकस नहीं रहा है इसलिए मैं बहुत ज्यादा चिंतित हूं.

सिंधी फाउंडेशन के निदेशक मुजफ्फर तालपुर ने कहा कि अगर कोई अधिकारों की बात करे तो वह गायब हो जाता है और चिंताजनक बात यह है कि हमें कई सिंधी कार्यकर्ताओं की लाशें मिली हैं तो ये अभी बड़ा मुद्दा है. अधिकांश युवा सिंधी अब डर में जी रहे हैं. पूरा समाज दहशत में जी रहा है.

भारत में दलितों की स्थिति काफी बेहतर

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पीएचडी छात्रा और दलित कार्यकर्ता रोहिणी गांधी ने कहा कि एक दलित लड़की होने के नाते मुझे गर्व है कि मुझे यहां आने का मौका मिला और अपनी बात रखने का मौका मिला. मैंने बताया कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की तुलना में भारत में दलितों की स्थिति काफी बेहतर है क्योंकि आरक्षण नीति हमारे भारत में है

मुझे खुद भारत सरकार से 1 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति मिली है तो मैं खुद एक इसका उदाहरण हूं, एक सफाई कर्मचारी की बेटी होने के नाते हम यहां तक पहुंचे हैं यह बड़ी उपलब्धि है.

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गुलामी, अपमान और राजनीतिक उत्पीड़न

इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में बोलते हुए जेएसएमएम के सज्जाद शर ने जानकारी दी कि उनका संगठन संयुक्त राष्ट्र निकायों का ध्यान मानवाधिकारों और राष्ट्रीय अस्तित्व के एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर लाना चाहता है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है.

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में सिंध के लोग पिछले 75 वर्षों से गुलामी, अपमान, राजनीतिक उत्पीड़न और आर्थिक शोषण के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं.