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फिर PM बनें मोदी ऐसा चाहते थे मुलायम, हमने जब कोई काम कहा, आपने तुरंत एक्शन लिया -मुलायम

मुलायम सिंह यादव ने साल 1996 में लोकसभा का पहला चुनाव लड़ा और संसद पहुंचे। वे 1996 से 2019 तक 7 बार जीते और 21 साल सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
 
फिर PM बनें मोदी ऐसा चाहते थे मुलायम, हमने जब कोई काम कहा, आपने तुरंत एक्शन लिया -मुलायम
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लोकसभा की कार्यवाही के दौरान ऐसे कई मौके आए जब मुलायम के तल्ख और नर्म लहजे देखे गए। हम आपको संसद में मुलायम के अलग-अलग अंदाज की ऐसी ही 3 कहानियां बता रहे हैं...

 

1. फरवरी 2019: PM मोदी से बोले- मैं चाहता हूं आप फिर से प्रधानमंत्री बनें


16वीं लोकसभा के बजट सत्र का आखिरी दिन था। मुलायम ने कहा, ’हम प्रधानमंत्री जी को बधाई देना चाहते हैं कि आपने सबसे मिलजुलकर और सबका काम किया। यह सच है कि हमने जब-जब आपसे किसी काम के लिए कहा तो आपने उसी वक्त ऑर्डर किया।

इसके लिए मैं आपका आदर और सम्मान करता हूं कि आपने सबको साथ लेकर चलने का पूरा प्रयास किया।' मुलायम ने आगे कहा, 'मेरी कामना है कि सारे सदस्य फिर से जीतकर आएं।

मैं कहना चाहता हूं कि हम लोग तो इतना बहुमत नहीं ला सकते तो आप फिर से प्रधानमंत्री बनें।'इस पर PM मोदी ने हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया और सदन ने मेज थपथपाकर मुलायम सिंह यादव की बात का समर्थन किया।

मुलायम सिंह के बयान पर मोदी ने कहा, ’अभी शुरुआत है बहुत कुछ करना बाकी है। इसके लिए मुलायम सिंह यादव ने आशीर्वाद दे ही दिया है।

मुलायम सिंह ने और काम करने के लिए शुभकामनाएं दी हैं। सभी को उनका स्नेह मिला है और आगे भी उनका मार्गदर्शन हमें मिलता रहेगा।’

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन पर PM मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। गुजरात की एक जनसभा में PM ने कहा कि उस दिन मुलायम सिंह जी का वो आशीर्वाद, सलाह के वो शब्द, आज भी मेरी अमानत हैं।

 

2. मार्च 2013: केंद्रीय मंत्री से बोले- तुम्हारी औकात क्या है


बात 2013 की है जब दिवंगत नेता और कांग्रेस सरकार में केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने अपने लोकसभा क्षेत्र गोंडा की एक रैली में मुलायम सिंह को लूटेरा और आतंकवादियों को मदद करने वाला शख्स बताया था।

इससे पहले फरवरी महीने में मुलायम सिंह यादव को राजनीति का सबसे खतरनाक जानवर करार दिया था। वर्मा के बयान से भड़के मुलायम सिंह ने लोकसभा में बेनी प्रसाद पर हमला बोला।

उन्होंने संसद में बेनी प्रसाद पर आरोप लगाते हुए कहा- जब ये कहा जाए कि मुलायम सिंह आतंकवादियों का संरक्षक है। मुसलमानों का ज्यादा पक्ष लेते हैं।

क्या मुसलमानों के आरक्षण और सच्चर आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की बात करने पर हम आतंकवादियों के समर्थक हो गए। क्या पूरे हिंदुस्तान का मुस्लिम आतंकवादी है। क्या अब्दुल हमीद और मौलाना अबुल कलाम आजाद को भूल गए।

इसके बाद लोकसभा स्पीकर ने मुलायम से कहा कि अब बेनी वर्मा को बोल लेने दें। इस पर मुलायम भड़क उठे और कहा- इनकी क्या औकात है कि ये बोलेंगे।

बेनी अपने आप को क्या समझते हैं। इन्होंने सारे मुसलमानों को आतंकवादी कहा है। बेनी अपने बयान के लिए माफी मांगें। इस पर बेनी प्रसाद के कहा कि मुलायम अब सुनेंगे नहीं। सच कड़वा होता है। इन्हें बाहर ही जवाब देना पड़ेगा।

3. जुलाई 2017: पाकिस्तान हमारा दुश्मन नहीं, चीन से खतरा


साल 2017 में संसद के मानसून सत्र के दौरान मुलायम ने चीन को लेकर सरकार को आगाह किया। उन्होंने कहा, ’हिंदुस्तान का सबसे बड़ा दुश्मन चीन है। हमने पहली भूल तो यह कर दी कि उन्हें तिब्बत दे दिया।

भारत को फिर से तिब्बत की आबादी का खुलकर समर्थन करना चाहिए। कश्मीर में पाकिस्तान के साथ चीनी सेना और चीनी हथियार लड़ाई में उतर गए हैं।

मुलायम ने आगे कहा, 'चीन सिक्किम और भूटान पर कब्जे की साजिश रच रहा है। सिक्किम और भूटान कि रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। पूरी तैयारी हो चुकी है। लेकिन यह सरकार सुन ही नहीं रही।

कितनी बार हम कह चुके हैं कि पाकिस्तान हमारा दुश्मन नहीं है, चीन है। पाकिस्तान हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। देश के लिए इससे ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल क्या हो सकता है।

चीन और भारत के बीच बहुत बड़ा व्यापारिक संबंध है। देश में खिलौने से लेकर हर सामान चीन का बिक रहा है। इसलिए हम आपसे कहना चाहते हैं कि सरकार भूटान और सिक्किम की मदद करे।

आपने इस संबंध में क्या कार्रवाई की है। इसकी जानकारी दीजिए। आप तीनों सेनाओं के प्रमुखों को बुलाकर इस पर चर्चा कीजिए।'

दो बार PM बनने से चूके थे मुलायम


मुलायम 1996 में पहली बार PM बनने के करीब पहुंचे थे। तब कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा ने इस चुनाव में 161 सीटें जीतीं और अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.

 लेकिन बहुमत न होने की वजह से 13 दिन बाद ही वाजपेयी ने इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस को 141 सीटें मिली थीं, लेकिन वह गठबंधन के साथ सरकार बनाने के पक्ष में नहीं थी। फिर लेफ्ट और बाकी विपक्षी पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाने की पहल की।

PM के लिए पहले वीपी सिंह और बंगाल के उस समय के CM ज्‍योति बसु का नाम सामने आया, लेकिन वीपी सिंह ने PM बनने से इनकार कर दिया।

इसके बाद लालू यादव और मुलायम के नाम की चर्चा हुई। चारा घोटाले में लालू का नाम आने की वजह से वे PM की रेस से बाहर हो गए। अब मुलायम का प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा था.

 लेकिन आखिरी समय में लालू और शरद यादव ने उनका रास्ता रोक दिया। इसके बाद एच डी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने और मुलायम सिंह को केंद्र में रक्षा मंत्री बनाया गया।

दूसरी बार 1999 के लोकसभा चुनाव के बाद फिर से मुलायम के PM बनने की चर्चा हुई, लेकिन विपक्ष के बाकी नेताओं की असहमति के वजह से वे इस बार भी चूक गए।