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अमृतपाल सिंह ने देखा ये नापाक सपना,कैसा होगा Khalistan?

Khalistan: सपने देखना अच्छी बात है मगर ऐसे सपने जो खुद को बर्बाद कर दे उनसे दूर हो जाना चाहिए. दशकों तक इन खालिस्तान का सपना संजो रखा है.

 
 अमृतपाल सिंह ने देखा ये नापाक सपना,कैसा होगा Khalistan? 
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आप चाहें कि एक कौम के कुछ लोगों को गुमराह कर देश को तोड़ देंगे तो ये आपकी बहुत बड़ी गलतफहमी होगी. क्योंकि इसका उदाहरण जम्मू-कश्मीर है और खुद पंजाब भी. जिसको 80-90 दशक में हजार कोशिशें हुईं मगर खालिस्तानी तोड़ नहीं पाए. हां, इससे देश को नुकसान बहुत हुआ. आर्मी के जवान शहीद हुए. बेगुनाह लोगों की जान गई. पंजाब के मशहूर क्रांतिकारी लेखक पाश ने तो खालिस्तानियों के खिलाफ खूब लिखा. उनकी एक कविता है मैं घास हूं कहीं पर भी उग जाऊंगा. खुली चुनौती थी आतंकियों के

70 का दशक शुरू ही हो रहा था कि खालिस्तान की आवाज ने जोर पकड़ लिया. इसके पहले सुगबुगाहट होती थी. मगर खुलकर इसकी मांग नहीं हुई थी. इसका चेहरा बने चरण सिंह पंछी और डॉक्टर जगजीत सिंह चौहान. हर आंदोलन का कोई चेहरा होता है तो ये दोनो इसका फेस बनने लगे. डॉक्टर चौहान ने तो ब्रिटेन, यूएस, पाकिस्तान भी गए. लेकिन इनको अपना सबसे सटीक अड्डा समझ में आया ब्रिटेन. इन्होंने वहीं अपना नेटवर्क स्थापित किया. दुनियाभर के तमाम देश घूमकर ये वापस भारत आए और 1978 में युवाओं को भड़काना शुरू किया. उनको खालिस्तान के सपने दिखाए. युवा भी नासमझी में इनके झांसे में आ गए इस तरह इन्होंने खालसा का गठन किया. इनकी भाषा में कहें तो खालिस्तान को सपना ये ऐसे दिखाते थे जैसे वो स्वर्ग लोक बन जाएगा.

लिए. लेकिन क्या आपने सोचा कि खालिस्तान कैसा होगा? ये क्या सोच रहे हैं?

नापाक सपनों का खालिस्तान

सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि खालिस्तान की मांग करने वाले कितने भाग में अपना कब्जा चाहते हैं. ये लोग पूरा पंजाब सहित चंडीगढ़, हरियाणा, हिमाचल, यूपी, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड राज्यों का कुछ हिस्सा खालिस्तान के दायरे में मानते हैं. अमृतपाल को लेकर पुलिस को जहां भी इनपुट मिल रहा है वहां रेड कर रही हैं. एक दिन पहले ही पंजाब पुलिस को खालिस्तान की करंसी, झंडा, फोर्स, बैनर ये सब सामान मिला. जाहिर है ये एक दिन या एक महीने में तो नहीं ही हुआ होगा. ये पूरी साजिश थी.

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बंदूक और तलवार की नोंक पर सिर्फ हिंसा हो सकती है आप एक देश का निर्माण नहीं कर सकते है. खालिस्तानियों ने देश को तोड़ने का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर रखा था. यहां की फौज कैसी होगी. यहां की करंसी कैसी होगी. भारत के कौन-कौन से हिस्से इसमें शामिल होंगे. यहां का झंडा कैसा होगा? भिंडरावाले ने यही ख्वाब देखे थे बाद में हश्र क्या हुआ ये पूरी दुनिया ने देखा. ये अमृतपाल खुद को उसका पार्ट-2 कहता है. खुद को ये भारतीय नहीं मानता. हालांकि दस्तावेजों में तो इंडिया की ही मुहर है लेकिन ये कहनात है कि ये मेरे लिए बस ट्रैवर करने का एक जरिया है.

उदाहरण के लिए देख लीजिए पाकिस्तान, तालिबान को

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जमीन का कुछ टुकड़ा और चंद लोगों के साथ क्या आप एक देश बना पाएंगे? खालिस्तान का सपना देखने वालों को अभी पता ही नहीं होगा कि इनका हश्र पाकिस्तान, तालिबान, सीरिया जैसे देशों की तरह हो जाएगा. जहां न तो संविधान माना जाता है और न ही नियम कानून को मायने रखते हैं. यहां पर हमेशा वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी रहती है. इसके कारण जनता बीच में पिस जाती है. देश चलाने के लिए पैसा कहां से आएगा. विदेशों से कौन निवेश लाएगा. ऐसे किसी भी अशांत क्षेत्र में उद्योग धंधे नहीं चलते. उदाहरण के लिए आपके पास कई मुल्क हैं. आप देख सकते हैं. ताजा उदाहरण ले लीजिए. कश्मीर में अपार संभावनाएं होने के बावजूद जब तक उग्रवादी, आतंकवादी, अलगाववादी का जोर रहा किसी भी कंपनी ने वहां पर जाकर अपना प्लांट नहीं लगाया. हालात सामान्य होने के बाद अब कहीं जाकर कंपनियां इंटरेस्ट दिखा रही हैं.