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PF खाताधारकों पर पैसे निकालने पर देना होगा Tax

Tax on EPF Withdrawal: कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद भी खुद को वित्तीय तौर पर मजबूत करने पीएफ में निवेश करता है। पीएफ एक तरह का फंड है। इसमें कर्मचारी और कंपनी दोनों निवेश करती है।
 
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Haryana Update: अगर कर्मचारी अपने योगदान पर आयकर अधिनियम 1961 के 80C के तहत मिलने वाले टैक्स छूट का लाभ उठाता है तब पीएफ कंट्रीब्यूशन को सैलरी का एक हिस्सा माना जाएगा। वहीं, अगर कर्मचारी 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ नहीं लेता है तो कंट्रीब्यूशन को टैक्स के दायरे में शामिल नहीं किया जाएगा।


5 साल से पहले निकासी पर कितना लगता है टैक्स-
पीएफ अकाउंट में जमा राशि के 4 हिस्से होते हैं- एम्प्लॉई का कंट्रीब्यूशन, एम्प्लॉयर का कंट्रीब्यूशन, एम्प्लॉयर के कंट्रीब्यूशन पर मिलने वाला इंटरेस्ट, इम्प्लॉई के कंट्रीब्यूशन पर मिलने वाला इंटरेस्ट। यह चारों इंटरेस्ट टैक्सेबल होते हैं।

अगर कर्मचारी अपने योगदान पर आयकर अधिनियम 1961 के 80C के तहत मिलने वाले टैक्स छूट का लाभ उठाता है तब पीएफ कंट्रीब्यूशन को सैलरी का एक हिस्सा माना जाएगा। वहीं, अगर कर्मचारी 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ नहीं लेता है तो कंट्रीब्यूशन को टैक्स के दायरे में शामिल नहीं किया जाएगा।
क्या है टैक्स को लेकर नियम-

अगर कर्मचारी लगातार 5 साल तक ईपीएफ में कंट्रीब्यूशन देता है तो उसे पीएफ से पैसे निकालने पर कोई टैक्स नहीं देना होता है। अब पीएफ होल्डर ने इन 5 वर्षों में एक कंपनी में नौकरी की है या एक से ज्यादा कंपनी में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है।

ईपीएफओ के नियम के अनुसार जब ईपीएफ मेंबर नौकरी छोड़ता है तो वह एक महीने में पीएफ अकाउंट में कुल जमा राशि का 75 फीसदी हिस्सा निकाल सकता है। अगर मेंबर 2 महीने से ज्यादा बेरोजगार रहता है तब वह पीएफ अकाउंट से पूरी राशि निकाल सकते हैं।