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Indian Notes: सरकार ने दिया जवाब, अब जारी होंगे प्लास्टिक नोट!

Indian Notes: आपको बता दें, की वित्त राज्यमंत्री ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक की 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार, नोटों की छपाई पर वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान कुल 4682.80 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।

 
Indian Notes

Haryana Update: भारत में प्लास्टिक नोट चलाने की खबरें काफी समय से आ रही हैं, और 2024 में प्लास्टिक नोट भी देखने को मिलेंगे। आज बहुत से देशों में ऐसे नोट चलन में हैं। वर्तमान खबरों को देखते हुए सवाल उठता है कि क्या सरकार वर्तमान कागज के नोटों को बदलने की योजना बना रही है? क्या पेपर नोटों की जगह प्लास्टिक करेंसी जारी की जाएगी? सरकार ने संसद में ये प्रश्न उठाया है। इस प्रश्न का जवाब देते हुए वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार ने प्लास्टिक नोटों का उत्पादन नहीं किया है। 

राज्यसभा में प्रश्नकाल में राज्यसभा सासंद अनिल देसाई ने वित्त मंत्री से पूछा कि क्या सरकार मौजूदा पेपर करेंसी को दूसरे देशों में चलने वाले नोटों से बदलने पर विचार कर रही है। उनका प्रश्न था कि प्लास्टिक नोट्स बहुत टिकाऊ हैं और फेक करेंसी बनाना बहुत कठिन है। प्लास्टिक करेंसी को भी अपने देश में लागू करने पर क्या सरकार विचार करेगी? 

वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने लिखित उत्तर देते हुए कहा कि सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के एक्ट 1934 के सेक्शन 25 के तहत प्लास्टिक नोट्स जारी करने का निर्णय नहीं लिया है। उनका कहना था कि भारतीय नोटों (भारतीय मुद्रा) को सुरक्षित रखना और उनका जालीकरण रोकना एक निरंतर प्रक्रिया है।

जब अनिल देसाई ने वित्त मंत्री से पेपर करेंसी नोटों और प्लास्टिक नोटों की छपाई की लागत के बारे में पूछा, तो वित्त राज्यमंत्री ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक की 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार, नोटों की छपाई पर वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान कुल 4682.80 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। प्लास्टिक करेंसी की छपाई पर कोई खर्च नहीं हुआ, उन्होंने कहा। 

आरबीआई (Reserve Bank of India) की 2015-16 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, 10 रुपये के अरबों नोट प्लास्टिक से बनाए जाएंगे। इन प्लास्टिक नोटों को ट्रायल बेसिस पर पांच शहरों (कोच्चि, मैसूर, शिमला, जयपुर और भुवनेश्वर) पर जारी किया जाना था। इस काम को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) नोट मुंद्रण प्राइवेट लिमिटेड और सिक्योरिटीज प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (Note Mudran Private Limited) ने संभाला था। लेकिन आरबीआई ने इस परियोजना को टाल दिया क्योंकि उच्च तापमान पर प्लास्टिक नोट्स में आग लगने का खतरा था।  

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