Mayor Election 2025 : आरक्षण से बदले शहरी सत्ता के समीकरण, हिसार को छोड़ सभी नगर निगम में बदल गया मेयर पद का जातीय समीकरण, हुड्डा के गढ़ रोहतक में एससी के खाते में गई सीट
हिसार को छोड़ सभी नगर निगम में बदल गया मेयर पद का जातीय समीकरण
इनमें चार सीटें एससी, बीसी-ए और महिला के लिए आरक्षित हो गई। पूर्व रिजर्व रही हिसार, पानीपत व करनाल की सीटें अब अनारक्षित हो गई है। मानेसर में पहला चुनाव हो रहा है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ रोहतक में मेयर का पद एसी के लिए आरक्षित हो गया है।
पिछली बार यह पद सामान्य वर्ग के लिए था। जिस पर भाजपा ने कब्जा कर लिया था। हालांकि इससे पहले यह पद एससी के लिए ही आरक्षित रहा। वहीं, प्रदेश का सबसे अहम शहर गुड़गांव मेयर की सीट बीसी-ए के खाते में गई है।
यहां बीसी-बी की आबादी ज्यादा है। इस बार इस सीट पर किसी यादव को लाने के लिए केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और हरियाणा के कैबिनेट मिनिस्टर राव नरबीर अपने-अपने करीबी के लिए पूरा जोर लगा सकते हैं। यहीं पास की मानेसर नगर निगम में भी पहली बार चुनाव होने हैं।
यहां मेयर पद अनारक्षित रखा गया है। फरीदाबाद में पुरुष नेताओं को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि यह सीट महिला के लिए आरक्षित हुई है। पिछली बार एससी महिला के लिए आरक्षित थी। अब वहां सामान्य वर्ग की महिलाएं भी चुनाव लड़ सकेंगे। ऐसे में पार्टियां फरीदाबाद, मानेसर और गुड़गांव में दो वर्गों को साधने के हिसाब से अपनी तैयारी करेंगी।
भाजपा सिंबल पर उतरेगी, कांग्रेस का अभी सिर्फ मेयर पद पर हुआ निर्णय
शहरी सरकार के चुनाव को लेकर भाजपा पूरी तैयारी कर चुकी है। वह सभी नगर निगम, परिषद और पालिका के चुनाव सिंबल पर लड़ने की घोषणा कर चुकी है। भाजपा नगर निकाय चुनाव में बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रही है। ताकि वह दिल्ली विधानसभा चुनाव में इसका प्रभाव दिखा सके।
वहीं, कांग्रेस निगम चुनाव तो सिंबल पर लड़ेगी लेकिन अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि परिषद -पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव सिंबल पर लड़ा जाए या नहीं। आम आदमी पार्टी भी सिंबल पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। अभी तक इनेलो और जजपा ने निर्णय नहीं लिया है।