Income Tax: अब CTC और टेक होम सैलरी पर कितना टैक्स कटेगा, जानें पूरा हिसाब

Income Tax: अब CTC (कॉस्ट टू कंपनी) और टेक होम सैलरी पर टैक्स के हिसाब में बदलाव हो सकते हैं। CTC में शामिल सभी लाभ, जैसे बोनस, इंसेंटिव और अन्य भत्ते, टैक्स के दायरे में आते हैं, जबकि टेक होम सैलरी में से कुछ कटौतियां जैसे EPF और प्रोविडेंट फंड को घटा लिया जाता है। जानें पूरी जानकारी कि आपके CTC और टेक होम सैलरी पर कितना टैक्स कटेगा!
 
 
Haryana update : अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो आपके एचआर और पेरोल विभाग ने आपकी सैलरी से पहले ही इनकम टैक्स का कैलकुलेशन कर लिया होगा और वे सैलरी अकाउंट में पैसे भेजने से पहले टैक्स काट लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनकम टैक्स विभाग आपके सीटीसी (Cost to Company) पैकेज और टेक होम सैलरी पर टैक्स कैसे निर्धारित करता है? यह जानकारी आपको अपनी सैलरी और टैक्स प्लानिंग के लिए महत्वपूर्ण है। आइए, इस प्रक्रिया को समझते हैं।

सीटीसी और टेक होम सैलरी क्या है?

  • सीटीसी (Cost to Company): यह वह कुल राशि है जो कंपनी को आपको हायर करने पर खर्च करनी पड़ती है। इसमें आपके वेतन के अलावा, कंपनी द्वारा दी जाने वाली अन्य सुविधाएं जैसे कि पीएफ, ग्रेच्यूटी, बोनस, मेडिकल इंश्योरेंस, और अन्य लाभ शामिल होते हैं।
  • टेक होम सैलरी: इसे ग्रॉस सैलरी भी कहते हैं। यह वह राशि है जो कंपनी द्वारा आपको वास्‍तविक रूप से दी जाती है। इसमें आपकी बेसिक सैलरी, बोनस, अलाउंस और अन्य घटक शामिल होते हैं, और इसे ही आपकी असल कमाई माना जाता है।

इनकम टैक्स किस पर कटता है?

सीटीसी और ग्रॉस सैलरी में अंतर समझना जरूरी है क्योंकि इनकम टैक्स की गणना ग्रॉस सैलरी के आधार पर की जाती है, न कि सीटीसी के।

  • सीटीसी पर क्यों नहीं कटता टैक्स? सीटीसी वह राशि है जो कंपनी आपके ऊपर कुल मिलाकर खर्च करती है, लेकिन इसमें पीएफ और ग्रेच्‍युटी जैसे कंपोनेंट्स शामिल होते हैं, जो टैक्स के दायरे से बाहर होते हैं। इसके अलावा, इसमें बोनस, इंसेंटिव, मेडिकल इंश्योरेंस, टर्म इंश्योरेंस जैसी दूसरी सुविधाएं भी शामिल होती हैं। इसलिए, सीटीसी आपकी वास्तविक कमाई नहीं है और इस पर इनकम टैक्स की गणना नहीं होती।

  • ग्रॉस सैलरी पर क्यों कटता है टैक्स? आयकर कानून के अनुसार, ग्रॉस सैलरी को वास्तविक कमाई माना जाता है। इसमें बेसिक सैलरी, बोनस, अलाउंस और अन्य कंपोनेंट्स शामिल होते हैं। इन सबको जोड़कर आपकी कुल कमाई की गणना की जाती है, और इस पर टैक्स की गणना की जाती है। टैक्स कटौती के बाद जो राशि बचती है, वही टेक होम सैलरी होती है, जिसे कंपनी आपके खाते में जमा करती है।

इस तरह, आयकर विभाग ग्रॉस सैलरी को आधार बनाकर आपकी वास्तविक कमाई का आकलन करता है और उसी पर टैक्स की गणना करता है।