हरियाणा में नई तूड़ी खाने से पशुओं को हो रही है ये बीमारी
Haryana News: कॉल सेंटर के मैनेजर साहिल सहगल ने बताया कि हर समय कॉल सेंटर में एक पशु चिकित्सक है, जो पशुपालकों की शिकायत सुनकर फोन पर समाधान बताता है।
Haryana Update: आपको बता दें, की हरियाणा में पशु सहायता वैन के बारे में जागरुकता बढ़ी है। पशुओं को नई तूड़ी खाने से कब्ज होता है। तूड़ी के कारण पशुओं में निमोनिया और कीड़े भी होते हैं। 1962 में पशुपालन विभाग द्वारा शुरू की गई पशु स्वास्थ्य सेवा हेल्पलाइन नंबर पर हर दिन 200 फोन आते हैं। पशुपालकों की सहायता के लिए विभाग भी एक ऐप बनाने वाला है।
27 फरवरी से पशु कॉल सेंटर ने काम शुरू किया था। 1962 संख्या पशुपालकों को 24 घंटे सेवा देती है। रात में भी पशु को किसी तरह की परेशानी होने पर टेलीमेडिसिन सेवा दी जाती है। पशुपालकों को दोपहर 12 बजे से रात आठ बजे तक पशु सहायता वैन उपलब्ध है। कॉल सेंटर के मैनेजर साहिल सहगल ने बताया कि हर समय कॉल सेंटर में एक पशु चिकित्सक है, जो पशुपालकों की शिकायत सुनकर फोन पर समाधान बताता है। कॉल सेंटर के कर्मचारियों और चिकित्सकों को 8 से 8 घंटे की तीन शिफ्ट में सेवा दी जाती है।
सहगल ने बताया कि मार्च महीने में 5109 स्थानों पर सहायता वैन भेजी गईं और 5830 कॉल आईं। अन्य 800 पशुपालकों को मोबाइल टेलीमेडिसिन सेवाएं दी गईं। उन्हें बताया कि पशुओं में इस समय नई तूड़ी खाने से कब्ज की शिकायत हो रही है। इसके अलावा निमोनिया, डायरिया और अफारा के मामले भी बढ़ रहे हैं। इससे पहले पशुओं ने बुखार, गर्भपात, गर्भधारण न करना और चोट लगने की शिकायतें की थीं।
महेंद्रगढ़ जिले के पशुपालक इस सेवा का सबसे अधिक लाभ उठाते हैं। भिवानी जिला दूसरे स्थान पर है। पंचकूला से सबसे कम फोन आते हैं। पंचकूला से एक महीने में केवल एक फोन आया था। वह भी कुत्ते की बीमारी का इलाज करता था। फरीदाबाद और गुरुग्राम से भी कम फोन आते हैं। इन जिलों से पशु चोटिल होने के अधिक फोन आते हैं।
इस परियोजना के पहले चरण में राज्य में सत्तर पशु सहायता वैन उपलब्ध कराई गई हैं, जो 30 से 35 मिनट में पहुंचती हैं। जिसमें हिसार में 7, फतेहाबाद में 4, सिरसा में 5, भिवानी में 6, करनाल में 4, कैथल-कुरुक्षेत्र में 4 और रोहतक में 3 हैं। 3 पलवल और सोनीपत में 3, महेंद्रगढ़ में यमुनानगर में दो, नूंह में दो, जींद में पांच, झज्जर में तीन, पानीपत में दो और फरीदाबाद में दो हैं। गुरुग्राम में दो, रेवाड़ी में दो और अंबाला में दो एंबुलेंस हैं। फोन कॉल सेंटर में आने पर निकटतम एंबुलेंस मौके पर भेजा जाता है। पशु सहायता वैन को 30मिनट में पहुंचने का लक्ष्य है। हर वैन में जीपीएस लगा हुआ है, जो अधिकारियों को इन वैन की वर्तमान लोकेशन बताता है।
अधिकारी ने कहा कि पशु सहायता वैन को लेकर जागरुकता काफी तेजी से बढ़ रही है। भिवानी और महेंद्रगढ़ जिले से सबसे अधिक कॉल आते हैं। पंचकूला से सबसे कम फोन आते हैं। पंचकूला से एकमात्र फोन आया था। कुत्ते का इलाज वह करता था। यदि समय की बात की जाए तो दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक सबसे अधिक फोन आते हैं। पशुपालक भी जल्द ही इसके एप से लाभ ले सकेंगे। -साहिल सहगल, पशु सहायता कॉल सेंटर, हिसार का प्रोजेक्ट मैनेजर