Sankashti Chaturthi 2023: फाल्गुन माह की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत आज 09 फरवरी दिन गुरुवार को है,जान लें मुहूर्त, पूजा विधि, चंद्र अर्घ्य समय और महत्व

Haryana update: आज है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी,द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत और पूजा करने वाले पर गणेश जी होते हैं बहुत प्रसन्न
 

Haryana Update : वे उसके सभी प्रकार के कष्टों और विघ्न बाधाओं को पलभर में ही दूर कर देते हैं। सं​कटों को मिटा देने वाला व्रत है संकष्टी चतुर्थी। गजानन जी के शुभ आशीर्वाद से व्यक्ति अपने समस्त कार्यों को सफल कर सकता है। काशी के पंडित शिवम शुक्ला बता रहे हैं । 

संकष्टी चतुर्थी के व्रत और पूजा में गणेश जी के साथ चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य देते हैं. यह अनिवार्य अंग है इस व्रत का. इसके बिना व्रत पूरा नहीं होता है। कृष्ण पक्ष में चंद्र देव देर से उगते हैं, इस वजह से देर रात तक व्रती लोगों को चंद्रमा की प्रतीक्षा करनी होती है। 

उसके बाद ही पारण होता है या अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2023 का पूजा मुहूर्तजो लोग आज 09 फरवरी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत हैं, वे लोग सुबह में स्नान ध्यान कर लें. सूर्य देव को जल दे दें. फिर सुबह में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की पूजा करें।

 इसमें आप सुबह 07:05 एएम से सुबह 08:27 एएम बजे के बीच गणेश जी की पूजा कर लें. चौघड़िया में यह शुभ उत्तम मुहूर्त है।

हालांकि आप सूर्योदय के साथ ही पूजा कर सकते हैं क्योंकि उस समय सुकर्मा योग रहेगा. इस योग में किए गए कार्यों का शुभ फल प्राप्त होता है. इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र सुबह से रात 10:27 पीएम तक है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2023 चंद्र अर्घ्य समयदिन में गणेश जी की पूजा अर्चना के बाद आप रात में चंद्रमा को अर्घ्य देंगे. इस दिन चंद्र के अर्घ्य का शुभ समय रात 09:18 पीएम से शुरू होगा क्योंकि इस समय ही चंद्रोदय हो रहा है. स्थान के आधार पर कहीं जल्दी तो कहीं देर से चंद्रमा का उदय होगा।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2023पंडित शिवम शुक्ला के अनुसार, 09 फरवरी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी तिथि सुबह 06:23 एएम से शुरू हो रही है और 10 फरवरी को सुबह 07:58 एएम पर खत्म हो जाएगी।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधिसबसे पहले तो सुबह उठकर पूजा स्थान को अच्छे से साफ कर लीजिए. बासी फूल और पूजा सामग्री को हटा दें. सुबह नहाने के बाद गणेश जी की स्थापना करके उनको स्नान करा दें. फिर उनको वस्त्र, जनेऊ, दूर्वा, सिंदूर, मोदक, पान, सुपारी, अक्षत् आदि चढ़ाकर पूजा कर लें।
संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
को पढ़ें, फिर
गणेश जी की आरती
कर लें। फिर दिनभर अन्न ग्रहण न करें. रात को चंद्रमा को जल चढ़ाएं. उसके बाद पारण कर लें।