‘हजारों KM लंबी अस्थिर सीमाएं, सेना प्रमुख बोले  घुसपैठ रोकना सेना के लिए बड़ी चुनौती

जनरल मनोज पांडे ने कहा कि हमारे पास अस्थिर सीमा है, जो हजारों किलोमीटर लंबी है. इसमें जंगल, रेगिस्तान, दुर्गम पहाड़ी वाले क्षेत्र हैं. वहीं देश की सुरक्षा के लिए सेना को घुसपैठ रोकना सबसे बड़ी चुनौती है.

 

नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने बुधवार को कहा कि अस्थिर सीमाओं की चुनौतियां सेना को उलझाए हुए हैं. इसका रणनीतिक निवारण होना आवश्यक है. जनरल मनोज पांडे डेफ-टेक इंडिया के पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड विजन इनिशिएटिव्स द्वारा भारत की क्षेत्रीय क्षमताओं और प्रौद्योगिकी आवश्यकताओं पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.

उन्होंने का कि यह तीसरा साल है जब भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में विवादित वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एक सैन्य गतिरोध बना हुआ है.

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जनरल पांडे ने कहा कि यह समझना बेहद जरुरी है कि सीमा प्रबंधन में कमजोरियां संघर्ष का कारण बन सकती हैं. इसलिए, पहली अनिवार्यता यही है कि रणनीति के तहत इस समस्या का निवारण किया जाए. सेना प्रमुख ने कहा कि आतंवाद के खिलाफ अभियानों के दौरान हमें अपनी प्रतिक्रिया की तैयारियों को कम नहीं करना चाहिए.

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इस दौरान सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के कई महत्वपूर्ण बातों पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि जमीन के साथ ताकत युद्ध को निर्णायक बनाती है. ये युद्ध देखकर लगता है कि भारत को भी जंग के लिए तैयार रहने की जरुरत है. साथ ही यह भी पता चलता है कि दूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती है. उन्होंने कहा कि एकीकृत युद्ध समूहों को आकार देने का हमारा प्रयास इस अनिवार्यता के अनुरूप है.

जनरल पांडे ने कहा कि हमारे पास अस्थिर सीमा है, जो हजारों किलोमीटर लंबी है. इसमें जंगल, रेगिस्तान, दुर्गम पहाड़ी वाले क्षेत्र हैं. वहीं देश की सुरक्षा के लिए सेना को घुसपैठ रोकना सबसे बड़ी चुनौती है. जनरल ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा के लिए सेना को हाइटेक हथियार, उपकरण और सैन्य तंत्र की जरूरत है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि हम इसके लिए दूसरे देशों पर बहुत भरोसा नहीं कर सकते.