AIIMS में 3000 से ज्यादा रिसर्च स्टाफ को हटाने की चल रही है तैयारी, जानिए क्या है वजह

एम्स के निदेशक व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने 3000 से अधिक रिसर्च कर्मचारियों को निकालने का निर्णय लिया है।
 

Haryana Update: भारत सरकार ने वर्तमान में रोजगार के मौको को बढ़ावा देने के लिए एक तरफ से रोजगार अभियान चलाया हुआ है। दूसरी ओर, एम्स (अलि इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) के निदेशक व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने 3000 से अधिक रिसर्च कर्मचारियों को निकालने का निर्णय लिया है। इससे सैकड़ों रिसर्च कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, अध्ययन कर्मचारियों ने धरने और प्रदर्शन करके अपने अधिकारों की रक्षा की अपील की है।

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यह भी उचित लगता है कि कोरोना काल में इन लोगों को “Corona Warrior” के रूप में सम्मानित किया गया, जो उनके प्रयासों को प्रशंसा करता था।


लेकिन वे एक ओर प्रशंसा पा रहे हैं और दूसरी ओर कुछ न्यायिक आदेशों के अंतर्गत उनकी नौकरी छीन रहे हैं। UCJ ने एम्स प्रशासन को 15 साल की सेवा के पश्चात नियमित करने का आदेश दिया।

यह न्यायिक निर्णय भी 10 वर्ष से काम कर रहे कर्मचारियों को अवसर देना चाहिए और 15 वर्ष के बाद उन्हें नियमित किया जाना चाहिए। यही कारण है कि एम्स प्रशासन को 10 वर्ष से कम समय से काम कर रहे लोगों को सेवा से वंचित नहीं करना चाहिए।

राजनीतिक और नैतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए, इस स्थिति में रिसर्च स्टाफ के उचित अधिकारों की सुरक्षा के लिए सरकार से बातचीत का माध्यम चुनना उचित हो सकता है। रिसर्च कर्मचारियों का देश की समृद्धि में योगदान महत्वपूर्ण है, इसलिए सरकार को इस विषय में चिंतित होकर समाधान खोजना चाहिए।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने अपने भाषण में एम्स निदेशक के आदेशों और माननीय कोर्ट के आदेशों के बीच कई रोचक तुलना की है। उन्होंने दावा किया कि निदेशक केवल माननीय स्वास्थ्य मंत्री की आज्ञा मानते हैं और वे तत्काल 3,000 से अधिक अध्ययन कर्मचारियों को हटाना चाहते हैं।

उन कर्मचारियों ने बताया कि वे सभी चयन प्रक्रियाओं को पारित करके एम्स में भर्ती हुए थे।

यहाँ कुछ कर्मचारियों ने 10 साल से व कुछ को 15 साल से काम किया है, लेकिन अचानक एकाधिकारी ने उन्हें बताया कि उनकी सेवा पर्याप्त नहीं है। उन्हें लगता है कि उन्हें आत्महत्या करने की प्रेरणा मिल रही है, और उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त की है कि इससे उनकी आय को नुकसान हो रहा है।

इन कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और एम्स के डायरेक्टर से अपील की है कि उन्हें नौकरी से नहीं निकाला जाए और उनकी आजीविका को बचाया जाए।

यह प्रदर्शन और विरोध एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो सही समाधान की मांग कर रहा है। सरकार को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इन कर्मचारियों के सम्मान व अधिकारों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। सरकार को सोच समझकर इस समस्या को हल करना चाहिए।