Success Story: साइकिल ठीक करने से लेकर गैराज में लगाया झाड़ू-पोंछा, हर वक़्त मुश्किलों से लड़कर, इस इंसान ने खड़ी की होंडा मोटर्स
 

Success Story News:  साल 1936 में किसी रेसिंग कॉन्टेस्ट में एक हादसे के वजह से साइचिरो होंडा को काफी बुरी चोट लगी जिस कारण से वो तीन महीने अस्‍पताल में बिस्‍तर पर पड़े रहे जहाँ से उन्होंने यह निर्णय लिया.
 
 

Haryana Update, Sucess Story News: होंडा मोटर्स (Honda Motors) आज वैश्विक रूप से पहचानी जाने वाली ऑटोमोबाइल कंपनी है। इसने न केवल गाड़ियों और बाइकों का निर्माण किया है, बल्कि यह कई प्रकार के इंजन भी विकसित किए हैं। यह विश्वभर में मोटरसाइकिल निर्माण और बिक्री में एक अग्रणी कंपनी है। जापान के सोइचिरो होंडा (Soichiro Honda) ने इस अंतरराष्ट्रीय कंपनी की नींवें रखी थीं। होंडा मोटर्स को इस स्थान पर पहुंचाने में सोइचिरो होंडा ने कई कठिनाईयों और चुनौतियों का सामना किया। जन्म से गरीब लुहार के परिवार में उत्पन्न सोइचिरो ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए गैराज में छुट्टी-पोंछी तक सब कुछ लगा दिया। जब विश्वयुद्ध में फैक्ट्री तबाह हो गई और उनका पहला उत्पाद असफल हुआ, तब भी होंडा ने हार नहीं मानी और उन्होंने होंडा मोटर्स को उच्च स्थान पर पहुंचाकर ही दम लिया।

सोइचिरो होंडा का जन्म 1906 में जापान के एक छोटे से गाँव शिजुओका में हुआ था। सोइचिरो के पिताजी गिहेइ होंडा एक गरीब लुहार थे और वे साइकिल रिपेयर का काम भी करते थे। सोइचिरो को पढ़ाई में रुचि नहीं थी, लेकिन उन्हें औजारों के साथ खेलने का शौक था। इसी कारण उन्होंने 16 साल की आयु में पढ़ाई छोड़ दी और पिताजी के काम में हाथ बटाना शुरू कर दिया।

16 साल की उम्र में घर छोड़ना
एक दिन, सोइचिरो होंडा ने एक अखबार में ‘आर्टशोकाई’ कार कंपनी में मैकेनिक की नौकरी का विज्ञापन देखा। उन्होंने इसके लिए आवेदन किया और कंपनी ने उन्हें बुलाया। लेकिन जब कंपनी के मालिक ने उन्हें देखा, तो उन्हें मैकेनिक की नौकरी नहीं दी गई और उन्हें गैराज की सफाई करने का काम मिला। होंडा ने यहां काम शुरू किया और वहां मैकेनिक्स की मदद करते हुए काम सीखते रहे।

जापान में भूकंप के कारण

कंपनी के कई मैकेनिक अपने घरों को छोड़कर चले गए। इससे उन्हें कारें मरम्मत करने का अवसर मिला। उनकी मेहनत देखकर कंपनी के मालिक ने उन्हें कंपनी के दूसरे गैराज का प्रबंधन सौंप दिया, जहां रेसिंग कारों की मरम्मत की जाती थी। सोइचिरो होंडा ने उसके मालिक के साथ मिलकर रेसिंग कारों का डिज़ाइन किया। पहली रेसिंग कार इतनी खास नहीं थी, लेकिन दूसरी ने कमाल की मरम्मत की और 1924 में हुई जापानी मोटर कार रेस में पहला स्थान हासिल किया। उसके बाद वह कई साल तक आर्टशोकाई कंपनी में काम करते रहे।

1936 में हुए एक दुर्घटना ने उनकी जीवन में परिवर्तन किया

1936 में रेसिंग प्रतियोगिता के दौरान एक दुर्घटना में सोइचिरो होंडा को गंभीर चोटें आईं। वे तीन महीने तक अस्पताल में रहे। ठीक होने के बाद, उन्होंने आर्टशोकाई कंपनी के मालिक को पिस्टन रिंग्स बनाने के लिए एक अलग कंपनी शुरू करने का सुझाव दिया, लेकिन यह सुझाव स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद होंडा ने अपने मित्र के साथ मिलकर पिस्टन रिंग्स बनाने के लिए एक कंपनी शुरू की।

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पहला उत्पाद फेल हो गया था
 1939 में होंडा ने आर्टशोकाई को छोड़ दिया। उन्होंने कई कंपनियों से पिस्टन रिंग्स बेचने का प्रयास किया। टोयोटा से आर्डर भी प्राप्त हुआ, लेकिन उनका उत्पाद टोयोटा की गुणवत्ता टेस्ट पार नहीं कर सका और उसे अस्वीकृत कर दिया गया। यह बहुत निराशाजनक था, लेकिन होंडा ने हिम्मत नहीं हारी और एक बेहतर पिस्टन रिंग विकसित किया, जिसे टोयोटा ने स्वीकार कर लिया।

1944 में तबाह हो गई फैक्टरी के बाद
होंडा ने होमामातसु शहर में पिस्टन रिंग बनाने की कंपनी खोली, जो एक ऑटोमेटेड प्लांट थी। इसमें 2,000 कर्मचारी काम करते थे। लेकिन, दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकी हवाई हमलों में इसकी फैक्टरी पूरी तरह से तबाह हो गई। इसके बाद आए भूकंप से उनकी दूसरी इकाई भी ढह गई। होंडा ने अपनी बची हुई मशीनों को टोयोटा कंपनी को 45,000 येन में बेच दिया। 1946 में इसी पैसे से होंडा ने टेक्निकल रिसर्च इंस्टिट्यूट की स्थापना की।

साइकिल पर लगाए गए इंजन ने अद्भुत कार्य किया
 जापान में विश्व युद्ध के कारण सम्पूर्ण व्यापार बिलकुल अवरुद्ध हो गया था और वहां परिवहन के लिए साइकिल का उपयोग होता था। सोइचिरो होंडा ने एक जेनरेटर के इंजन को साइकिल पर लगा दिया, जिससे लोगों को बहुत अच्छा लगा। मांग बढ़ने पर होंडा ने एक टू-स्ट्रोक इंजन विकसित किया, और 1949 में अपनी कंपनी का नाम होंडा मोटर्स रख लिया।

सुपर Cub ने जीवन को परिवर्तित किया
सोइचिरो होंडा ने साइकिल के बाद मोटरसाइकिल लॉन्च की, लेकिन वह बहुत प्रचलित नहीं हुई। इसके बाद, उन्होंने 'सुपर कब' नामक एक फ्यूल-एफिशिएंट और हल्की बाइक को लॉन्च किया। यह बाइक एक शानदार सफलता बन गई, और 1960 के दशक में उन्होंने अमेरिका में कदम रखा। 1964 में, अमेरिका की सड़कों पर चलने वाली हर दूसरी बाइक होंडा की थी।

1963 में, सोइचिरो होंडा ने पहली कार
टी 360 मिनी ट्रक, बनाई। उन्होंने कई और कारें तैयार कीं, लेकिन उनमें कुछ खास पॉपुलर नहीं हुईं। बाद में, उन्होंने होंडा सिविक को बाजार में प्रस्तुत किया, जो एक लाइटवेट फैमिली कार थी और ने जापान और अमेरिका दोनों में बड़ा धूमधाम मचाया। इसके बाद, होंडा अकॉर्ड भी आई, जोने बहुत प्रशंसा प्राप्त की। 1980 के दशक में, होंडा मोटर्स ने दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कार कंपनी बनने में सफलता प्राप्त की।

1991 में, सोइचिरो होंडा का निधन हो गया
लेकिन उस समय होंडा मोटर्स का नेट वर्थ 92 बिलियन डॉलर था और उनके नाम पर 150 से ज्यादा पेटेंट थे। होंडा के तीन बच्चे थे, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को कंपनी का कमान नहीं दिया, बल्कि हाई स्किल्ड प्रोफेशनल्स को बढ़िया माना। यह फैसला भी सफल साबित हुआ और होंडा मोटर्स का शासन आज भी मजबूत है।

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