SGB, ETF, म्यूचुअल फंड या गोल्ड, किसने दिलाई सबसे ज्यादा कमाई?

SGB, ETF, म्यूचुअल फंड और फिजिकल गोल्ड—इनमें से किसने निवेशकों को सबसे ज्यादा कमाई कराई? जानिए किस विकल्प ने दिया सबसे बेहतर रिटर्न और किसमें निवेश करना रहेगा फायदेमंद।

 

HARYANA UPDATE : पिछले एक साल में सोने की कीमतों ने निवेशकों को काफी चौंका दिया है। 16 मई 2024 को जहां सोने का भाव लगभग ₹75,420 प्रति 10 ग्राम था, वहीं 22 अप्रैल 2025 तक यह बढ़कर ₹1,01,375 तक पहुंच गया। एक साल के भीतर करीब 27 फीसदी की यह बढ़त निवेशकों के लिए आकर्षक रही।

लेकिन यह जानना जरूरी है कि केवल सोने की कीमतों में बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि आपने किस तरीके से सोने में निवेश किया, इसका बड़ा असर आपके मुनाफे पर पड़ा।

Sovereign Gold Bond (SGB): सबसे बेहतर रिटर्न, पर सीमित विकल्प

अगर आपने एक साल पहले Sovereign Gold Bond (SGB) खरीदा होता, तो आपको सिर्फ 27 फीसदी ही नहीं, बल्कि इसके साथ हर साल 2.5 फीसदी ब्याज भी मिलता। कुल मिलाकर यह रिटर्न 29.5 से 30 फीसदी के बीच हो सकता था।

SGB का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सरकारी गारंटी वाला उत्पाद है और मैच्योरिटी तक रखने पर आपको कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ता। हालांकि, बीच में बेचने की सुविधा सीमित होती है। एक्सचेंज पर SGB ट्रेडिंग होती है, लेकिन यह मात्रा कम होती है और कीमतों में उतार-चढ़ाव भी अधिक रहता है।

साथ ही, आपको इसे कम से कम पांच साल तक रखना होता है।

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हालांकि, सरकार ने 2024 की शुरुआत से इसके नए इश्यू बंद कर दिए हैं। अब नए SGB जारी नहीं हो रहे। अब तक इस स्कीम के जरिए लगभग ₹72,000 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं, और निवेशकों के पास करीब 1.32 लाख किलो सोने के बराबर SGB मौजूद हैं।

Gold ETF: ट्रेडिंग के लिए लिक्विड और अच्छा विकल्प

जो निवेशक मार्केट में सक्रिय रहना चाहते हैं और अपनी पूंजी को आसानी से खरीद-फरोख्त के लिए रखना चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड ईटीएफ एक अच्छा ऑप्शन है।

पिछले एक साल में Gold ETF ने औसतन लगभग 26.5 फीसदी रिटर्न दिया है। हालांकि इसमें 0.3 से 0.5 फीसदी तक एक्सपेंस रेशियो लगता है, जिससे रिटर्न थोड़ा कम होता है।

Gold ETF में आपको रियल टाइम प्राइसिंग मिलती है, जिससे आप बाजार की स्थिति के हिसाब से फैसले ले सकते हैं। इसके अलावा, इसमें सोने को स्टोर करने की कोई चिंता नहीं होती, और सोने की शुद्धता को लेकर भी भरोसा रहता है।

ETF में आपको ब्याज नहीं मिलता, और इसमें टैक्स भी लागू होता है — एक साल से कम समय में निवेश पर 20% और लंबी अवधि के लिए 12.5% टैक्स।

Gold Mutual Fund: डीमैट के बिना भी निवेश का विकल्प

अगर आपके पास डीमैट खाता नहीं है, तब भी गोल्ड म्यूचुअल फंड के जरिए आप सोने में निवेश कर सकते हैं। ये फंड गोल्ड ETF में निवेश करते हैं, लेकिन इनके जरिए आप SIP और Systematic Withdrawal Plan जैसे विकल्प भी चुन सकते हैं।

पिछले साल इन फंड्स ने लगभग 25.5 से 26 फीसदी तक रिटर्न दिया है।

हालांकि, इसमें दो स्तर पर फीस लगती है — एक म्यूचुअल फंड मैनेजमेंट फीस और दूसरी ETF की एक्सपेंस फीस।

जहां ETF में आप लाइव ट्रेडिंग कर सकते हैं, वहीं म्यूचुअल फंड में यह सुविधा नहीं होती। लेकिन आम निवेशकों के लिए यह एक आसान और भरोसेमंद विकल्प है।

Physical Gold: भावनात्मक जुड़ाव, लेकिन कम रिटर्न

भारत में सोना जूलरी, सिक्के या बार के रूप में खरीदना लोगों की पुरानी आदत है। हालांकि, निवेश के लिहाज से यह तरीका सबसे कम लाभकारी होता है।

हाल के एक साल में सोने की कीमत में 27 फीसदी बढ़ोतरी हुई, लेकिन फिजिकल गोल्ड में वास्तविक रिटर्न 23-24 फीसदी के आसपास रहा।

इसका कारण है 3 फीसदी GST, जूलरी पर लगने वाला मेकिंग चार्ज और दुकानदार का मार्जिन।

जब बेचते हैं तो पूरी कीमत नहीं मिलती, और शुद्धता जांच जैसी परेशानियां भी होती हैं।

फिर भी, जिनके लिए सोना भावनात्मक या सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है, उनके लिए यह विकल्प हमेशा लोकप्रिय रहेगा।

Digital Gold: छोटे निवेश के लिए आसान, पर सीमित फायदे

आज डिजिटल गोल्ड कई फिनटेक ऐप्स और वॉलेट्स पर आसानी से उपलब्ध है। कोई भी व्यक्ति एक रुपये से इसकी शुरुआत कर सकता है।

जो सोना डिजिटल रूप में खरीदा जाता है, वह किसी सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है।

पिछले साल डिजिटल गोल्ड ने लगभग 26-27 फीसदी तक का रिटर्न दिया। लेकिन इसमें खरीद-फरोख्त के दामों में 2-3 फीसदी तक का अंतर रहता है, जिससे असली मुनाफा कम हो जाता है।

न इसमें ब्याज मिलता है, न टैक्स छूट मिलती है, और न ही इस पर सेबी या आरबीआई की निगरानी होती है।

इसलिए सुरक्षा और भरोसे के लिहाज से यह विकल्प कमज़ोर माना जाता है। छोटे निवेश के लिए ठीक है, लेकिन लंबी अवधि या बड़ी रकम के लिए उपयुक्त नहीं।

सोने में निवेश का सही तरीका कैसे चुनें?

अंत में यह समझना जरूरी है कि चाहे आप बॉन्ड लें, ETF खरीदें, म्यूचुअल फंड में जाएं, फिजिकल गोल्ड खरीदें या डिजिटल गोल्ड चुनें — आप तो अंत में सोने में ही निवेश कर रहे हैं।

फर्क इसलिए पड़ता है क्योंकि हर विकल्प की अपनी अलग लागत, सुविधाएं और सीमाएं होती हैं।

इसलिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपने निवेश का उद्देश्य क्या रखा है?

  • अगर आप लंबी अवधि के लिए सुरक्षित और टैक्स लाभ वाला निवेश चाहते हैं, तो Sovereign Gold Bond बेहतर होगा।

  • अगर आप मार्केट में सक्रिय रहना चाहते हैं और लिक्विडिटी चाहिए, तो Gold ETF बेहतर विकल्प है।

  • डीमैट खाता नहीं है तो गोल्ड म्यूचुअल फंड एक आसान रास्ता हो सकता है।

  • भावनात्मक और सांस्कृतिक कारणों से जूलरी खरीदना चाहते हैं, तो फिजिकल गोल्ड ही सही।

  • कम निवेश से शुरुआत करनी हो, तो डिजिटल गोल्ड देख सकते हैं, लेकिन जोखिम समझकर।

आपके निवेश के लक्ष्य, समय अवधि और जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर सबसे सही विकल्प चुनना जरूरी है।

अगर आप सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं तो इन बातों को ध्यान में रखकर ही कोई कदम उठाएं। सही चुनाव से आपका निवेश फायदेमंद भी होगा और भविष्य के लिए सुरक्षा का काम भी करेगा।