Old Pension Scheme : जानिए क्यों मोदी सरकार लागू नहीं कर रही पुरानी पेंशन योजना, हुआ बड़ा खुलासा
NPS (नई पेंशन स्कीम) 1 जनवरी 2004 से देश में लागू हो गया है। दोनों पेंशनों के कुछ अच्छे और बुरे पक्ष हैं। पुरानी व्यवस्था के तहत कर्मचारी को रिटायरमेंट के वक्त उनके वेतन की आधी राशि पेंशन के रूप में दी जाती है। क्योंकि पुरानी स्कीम में पेंशन का निर्धारण महंगाई दर और सरकारी कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी के अनुसार होता है। पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों का वेतन पेंशन के लिए नहीं कटेगा। इसके अलावा पुरानी पेंशन व्यवस्था में भुगतान सरकारी ऋण से होता है।
नवीन वेतन आयोग सफल
पुरानी पेंशन योजना में २० लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी मिलती है। साथ ही, रिटायर्ड कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को पेंशन का भुगतान किया जाता है। मुख्य बात यह है कि पुरानी पेंशन स्कीम में हर छह महीने बाद मिलने वाले DA का प्रावधान है; दूसरे शब्दों में, जब सरकार नया वेतन आयोग लागू करती है, तो भी पेंशन में बढ़ोतरी होती है।
केंद्रीय सरकार और विशेषज्ञों का कहना है कि पेंशन प्रणाली सरकार पर बहुत बड़ा बोझ डालती है। यही नहीं, पुरानी पेंशन योजना से सरकारी बजट अधिक प्रभावित होता है। मोमटेक सिंह अहलूवालिया ने भी इसी तरफ संकेत किया है।
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पुरानी पेंशन योजनाओं को लागू करना
पुरानी पेंशन व्यवस्था में कर्मचारियों की सैलरी से कोई कटौती नहीं हुई। NPS में कर्मचारियों की सैलरी से 10 प्रतिशत की कटौती होती है। नई पेंशन योजना में GPF की सुविधा नहीं है, लेकिन पुरानी योजना में थी।
नई पेंशन योजना में निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं है, लेकिन पुरानी योजना में रिटायरमेंट के समय की सैलरी की लगभग आधी राशि पेंशन के रूप में मिलती थी। क्योंकि पुरानी पेंशन एक सुरक्षित कार्यक्रम है, जिसका भुगतान सरकारी धन से होता है साथ ही, नई पेंशन योजना शेयर बाजार पर आधारित है, जिसमें भुगतान बाजार की चाल पर निर्भर करता है।
NPS पर रिटर्न अच्छा रहा तो कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय प्रोविडेंट फंड और पेंशन की पुरानी व्यवस्थाओं की तुलना में अधिक पैसा मिल सकता है। क्योंकि ये बाजार पर निर्भर हैं लेकिन कम रिटर्न भी हो सकता है।