Winter Cold: उत्तर भारत में क्यों पड़ रही ज्यादा ठंड, जानिए क्या होता है Cold Day का मतलब?
Haryana Update, Winter Cold News: मौसम विभाग ने जनवरी के दिनों को कोल्ड डे के रूप में घोषित किया है, जो ठंड की मात्रा को मापने का विशेष टर्म है। यह बताता है कि किसी दिन कैसे सामान्य से कोल्ड डे में परिणामित हो जाता है। यह भी हमें यह समझने में मदद करता है कि उत्तर भारत में ठंडा मौसम क्यों बर्फीला हो रहा है और हालात ऐसा क्यों कह रहे हैं कि ठंड अब और बढ़ेगी।
सवाल - क्या है कोल्ड डे?
मौसम विभाग के अनुसार, जब दिन का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से कम हो और अधिकतम तापमान में सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस की कमी आ जाए तो ऐसे दिन को कोल्ड डे कहते हैं। उत्तर भारत में नए साल की शुरुआत के बाद से यह अवस्था देखी जा रही है। 4 जनवरी को दिल्ली में अधिकतम तापमान को 12.5 डिग्री सेल्सियस पर रिकॉर्ड किया गया जबकि न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस था। इसके कारण दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में ठंडक बढ़ गई और लोगों ने ठंड की कड़ाक महसूस की।
सवाल – नॉर्मल तापमान क्या होता है, क्या ये सभी देश या हर क्षेत्र में अलग अलग होता है?
भारत भौगोलिक रूप से विविधतापूर्ण देश है. इसी कारण यहां तापमान की विभिन्न श्रेणियां देखी जा सकती हैं. इस कारण देश में सामान्य तापमान -2°C से 40°C तक हो सकता है. यदि आप उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ते हैं, तो स्थानीय भौगोलिक स्थिति और आबोहवा के आधार पर स्थानीय तापमान में भी अंतर हो सकता है।
सवाल – भारत के शहरों का सामान्य तापमान क्या होता है, खासकर उत्तर भारत के शहरों का?
उत्तर भारत भारत के ठंडे क्षेत्रों में एक है। यहां का औसत दैनिक तापमान 31 डिग्री सेल्सियस होता है। साल के कई महीनों में औसत तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास होता है, जबकि कभी-कभी यह 35-40 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इसके बावजूद, दिसंबर से फरवरी के बीच सर्दी अधिक होती है, जिसमें तापमान उत्तर-पश्चिम में 10-15 डिग्री सेल्सियस के आसपास होता है। जैसे-जैसे भूमध्य रेखा की दिशा में बढ़ते हैं, वहां तापमान बढ़ता है।
बेंगलुरु का औसत तापमान 29 डिग्री सेल्सियस है. नैनीताल का औसत तापमान 15°C होता है और मौसम सुहावना होता है. श्रीनगर में औसत न्यूनतम तापमान 0°C और अधिकतम तापमान 30°C रहता है.
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सवाल – इस वक़्त उत्तर भारत में क्यों कड़ाके की ठंड पड़ रही है?
इसके अनेक कारण हैं. 1. बर्फबारी: पड़ोसी प्रदेशों में हो रही बर्फबारी ने उत्तर भारतीय क्षेत्रों में ठंडक बढ़ा दी है।
2. समुद्र की लहरें: पश्चिम से आने वाली ठंडी लहरें और भूमध्य सागर से निकली नमी भरी लहरें भी हैं, जो ठंडी हवा को लेकर आती हैं।
3. भौगोलिक स्थिति: उत्तर भारतीय क्षेत्र ज़मीन से घेरा हुआ है, इसलिए यहां का तापमान बड़ा होता है। इससे दैनिक तापमान का दायरा बड़ा हो जाता है और रात में तापमान तेजी से गिरता है।
4. बादलों का ढंका होना: बादलों के ढंके होने से सूर्य की किरणें पूरी तरह पहुंच नहीं पाती, जिससे तापमान गिरने लगता है।
5. दबाव अंतर: उत्तर-पश्चिम एशिया में जेट स्ट्रीम में “अपेक्षाकृत उच्च वायुमंडलीय दबाव का एक लंबा क्षेत्र” है, जिसके कारण भारत में शीत लहरें चलनी शुरू होती हैं।
सवाल – बुरी तरह ठंड की स्थिति क्या होती है, क्या ऐसी ठंड भी उत्तर भारत में आने वाले दिनों में आ सकती है?
यदि मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस या अधिकतम तापमान औसत से 6.4 डिग्री सेल्सियस या ज्यादा नीचे गिर जाता है तो भारत मौसम विभाग यानि आईएमडी इसे ‘गंभीर शीत लहर या गंभीर ठं’ घोषित करता है. हालांकि दिल्ली या उत्तर भारत में ये स्थिति आने का अंदेशा नहीं जताया गया है। अगर ये स्थिति आती है तो ऐसी स्थिति का आना मानव शरीर के लिए घातक माना जाता है.
सवाल – दिल्ली और उत्तर भारत में क्या ठंड की मौजूदा स्थिति से राहत मिल सकेगी?
भारत मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक ठंड की स्थिति यही रहेगी। हालांकि अधिकतम तापमान जरूर 13 से 14 डिग्री सेल्सियस हो सकता है। न्यूनतम तापमान 06 डिग्री से 08 डिग्री के बीच रहना चाहिए। हां 08 जनवरी से सूर्य के दर्शन हो सकते हैं और इसके साथ ही ठंड से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
सवाल – फिलहाल उत्तर भारत में जो ठंड बढ़ी है, उसके लिए क्या चीजें जिम्मेदार हैं?
बादलों का नहीं के बराबर होना लेकिन कोहरे और स्मॉग की स्थिति लगातार बने रहना, जिसकी वजह से सूर्य के दर्शन नहीं हो रहे. साथ ही उत्तराखंड से लेकर हिमाचल के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी का होना.
सवाल – उत्तर भारत में पड़ रही है ठंड का क्या ला नीना यानि ज्यादा बारिश से भी कोई लेना देना है?
ला नीना यानि ज्यादा बारिश का इफेक्ट सीधे नहीं दिखता है लेकिन मौसमी पैटर्न पर इसका असर तो बताया ही जा रहा है. दरअसल इसका असर प्रशांत महासागर में शुरू होता है. गर्म पानी ठंडे पानी के ऊपर तैरता है. गर्म पानी इंडोनेशिया की ओर बह जाता है. परिणामस्वरूप, ठंडा पानी सतह पर आने लगता है. इससे ठंडी हवाएं वहां से उत्तर भारत की ओर आती हैं. आईएमडी के मुताबिक ला नीना दिसंबर से फरवरी 2023 तक जारी रहने की उम्मीद है. इसी वजह से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस जैसे हालात भी बनते हैं.
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