logo

Turkey: बिन मां-बाप अनाथ हो गए सैकड़ों मासूम, हालत देख दहल जाएगा दिल

Earthquake rescues offer hope in Turkey and Syria: सोचिए, आपका क्या नाम है वो भी गुम हो गया? उन मासूमों को खुद का नाम तो याद नहीं न वो अभी बोल सकते हैं. उनके मां-बाप भी गुजर गए. अब उनका नाम बेनाम है....
 
Turkey: बिन मां-बाप अनाथ हो गए सैकड़ों मासूम, हालत देख दहल जाएगा दिल 
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

तुर्की विनाशकारी भूकंप के 144 घंटे बीत चुके हैं मगर नहीं कम हो रहीं तो बस दर्द भरी दास्तां. हर सेकेंड, हर मिनट, हर घंटे एक नई कहानी आपका कलेजा चीर देगी. कुदरत का ऐसा कहर बरपा कि आज दुधमुंहे बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ गया.

 

कई बच्चों का आहार सिर्फ मां का दूध था. शायद जब वो बड़े होंगे तो उनको मां-बाप का चेहरा भी याद नहीं होगा. ये मंजर उनकी आंखों से धुंधले पड़ जाएंगे. सिर्फ तस्वीर और बड़े लोगों की कहानियों में वो अपने वालिद-वालिदा को सुन पाएंगे और देख पाएंगे.

 


ज़ुबैर रिज़वी साहब की एक ग़ज़ल शुरू होती है एक शेर से, मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना, जहां दरिया मिले बे-आब मेरा नाम लिख देना. आज वो मासूम जिंदा तो हैं मगर गुमनाम हो गए हैं.

जैसे-जैसे रेस्क्यू ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है. परत दर परत कहानियां सामने आ रही हैं. ऐसी तस्वीरें, जिनको लगता है बस देखते रहो. वो उदास चेहरे, आरजू भरी निगाहें, जिंदगी की आस, अपनों को खोने का दर्द…ये सब चेहरा बयां कर रहा है… तुर्की का अदाना सिटी अस्पताल ऐसे बच्चों से भरा पड़ा है.

मासूम बच्चों की अपनों को तलाश
ये बच्चे बहुत छोटे हैं. कोई तीन महीने का, कोई छह महीने का कोई एक, तीन, पांच साल ऐसे. ये बच्चे अभी सिर्फ दर्द महसूस कर रहे हैं जो जख्म इनके शरीर में लगे हैं उनका लेकिन ये अभी समझ नहीं पाए कि इन्होंने कितना कुछ खो दिया है.

बीबीसी की एक रिपोर्ट में बताया कि इंटेंसिव केयर यूनिट में डॉक्टर एक घायल छह महीने की बच्ची को बोतल से दूध पिला रहे थे. इनके मां-बाप का कुछ पता नहीं. या तो वो मर गए या फिर अभी तक लापता हैं.

Turkey

नहीं मिल रहे मां-बाप, बेनाम हो गए सैकड़ों बच्चे
ऐसे बच्चों के सैकड़ों और मामले हैं जिनके माता-पिता मर चुके हैं या उनका पता नहीं चल रहा है. भूकंप ने उनके घरों को तोड़ दिया. यकीन मानिए इस हादसे में उन बच्चों का नाम भी ले लिया.

क्योंकि इनका नाम तो उनके मां-बाप को ही पता था अब वो नहीं रहे तो इनका नाम नहीं रहा. एक नर्स हैं जिनका नाम केस्किन है. वो देखभाल में बच्ची का हाथ पकड़ती हैं, जिसे उसके बिस्तर पर लगे टैग से ही जाना जाता है. वो टैग है ‘बेनामी’.


भूकंप से बच गया एक अस्पताल
उसके शरीर में कई फ्रैक्चर हैं. एक आंख काली पड़ी हुई है. उसका चेहरा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है. लेकिन वह मुड़ती है और डॉक्टर्स को देखकर मुस्कुराती है. अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ और उप निदेशक डॉ केस्किन कहते हैं, ‘हम नहीं जानते हैं कि वह कहां मिली थी और वह यहां कैसे पहुंची. लेकिन हम पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

तलाश जारी है.’ इनमें से कई मामले अन्य क्षेत्रों में ढही हुई इमारतों से बचाए गए बच्चों के हैं. उन्हें अदाना लाया गया क्योंकि अस्पताल अभी भी खड़ा है. आपदा क्षेत्र में कई अन्य चिकित्सा केंद्र गिर गए हैं या क्षतिग्रस्त हो गए हैं. अदाना एक बचाव केंद्र बन गया.